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कोरोना मरीजों का इलाज कर रहे डॉक्टरों के लिए IIT ने बनाया प्रोटेक्टिव स्प्रे

कोरोना मरीजों का इलाज कर रहे डॉक्टरों के लिए IIT ने बनाया प्रोटेक्टिव स्प्रे
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दुनिया में कोरोना वायरस का कहर जारी है. कई देशों में हजारों लोगों की जान जा चुकी है. कोरोना वायरस का संक्रमण फैलता जा रहा है. वहीं, भारत में भी कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है. प्रतिदिन दर्जनों नए मामले सामने आने से लोग काफी चिंतित हैं. इसके चलते सरकार ने पूरे देश में लॉकडाउन लगा दिया है.
कोरोना मरीजों का इलाज कर रहे डॉक्टरों के लिए IIT ने बनाया प्रोटेक्टिव स्प्रे
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कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों का इलाज कर रहे डॉक्टरों और चिकित्सा कर्मचारियों के लिए यह अधिक चुनौतीपूर्ण समय है. वे लोग अपने जीवन को खतरे में डालकर कोरोना वायरस का इलाज कर रहे हैं. उन्होंने सभी लोगों से अपील की है कि हम घर से बाहर हैं ताकि आप सुरक्षित रह सकें इसलिए घर में रहें ताकि कोरोना के संक्रमण को फैलने से रोका जा सके.'
कोरोना मरीजों का इलाज कर रहे डॉक्टरों के लिए IIT ने बनाया प्रोटेक्टिव स्प्रे
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कोरोना वायरस की इस लड़ाई में डॉक्टर और चिकित्सा कर्मचारी पीपीई (PPE)/व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (Personal Protective Equipment) का उपयोग करते हैं. पीपीई के जरिए  डॉक्टरों और चिकित्सा कर्मचारी खुद को कोरोना मरीज के संक्रमण के संपर्क में आने से बचाते हैं.
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अब, IIT गुवाहाटी के शोधकर्ताओं ने PPE को कोरोना वायरस (COVID-90) से मुकाबले के लिए और अधिक प्रभावी बनाने का एक तरीका खोज लिया है. उन्होंने एक माइक्रोबियल स्प्रे (microbial spray) आधारित कोटिंग विकसित की है, जो सतह के संपर्क में आने पर माइक्रोबस (Microbes) को मार देता है. ये एक तरह का एंटी बैक्टीरियल स्प्रे है.
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शुरुआती तौर पर समाचार न्यूज एजेंसी आईएएनएस ने एक  रिपोर्ट में ये दावा किया था कि स्प्रे का मिश्रण तांबा, चांदी जैसी सक्रिय सामग्री (Active ingredent) से बना है जो कि एक एंटीमाइक्रोबल ऐजेंट की तरह काम करता है. वैज्ञानिकों का मानना ​​है कि पीपीई पर स्प्रे माध्यमिक संक्रमण (Secondary infection) को सीमित करने में मदद कर सकता है जो आमतौर पर माइक्रोबस (microbes) के फैलने से होता है.
कोरोना मरीजों का इलाज कर रहे डॉक्टरों के लिए IIT ने बनाया प्रोटेक्टिव स्प्रे
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इस मिश्रण को कपड़ों सहित किसी भी प्रकार की सतह पर स्प्रे या डिप-कोट किया जा सकता है, साथ ही ये चिकित्सा उपकरणों को भी माइक्रोबस मुक्त बनाने में कारगर साबित होगा. उल्लेखनीय है कि इससे पीपीई को दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है वो भी बिना इस डर से की इससे माइक्रोबस फैल सकते हैं. 
कोरोना मरीजों का इलाज कर रहे डॉक्टरों के लिए IIT ने बनाया प्रोटेक्टिव स्प्रे
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कोरोना वायरस के एंटी बैक्टीरियल स्प्रे के साथ-साथ, शोधकर्ताओं ने फेस मास्क को बनाने वाले 3 डी प्रिंटर की मदद से ईयर गार्ड भी बनाए हैं. इस ईयर गार्ड को बहुत ही खास तरीके से बनाया गया है जो कि कान और फेस मास्क पर ज्यादा दबाव नहीं बनाएगा. आमतौर पर दुनिया भर के डॉक्टरों को घंटों मास्क लगाने से कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है जोकि घंटों मास्क पहनने के बाद उनके चेहरे पर दिखाई पड़ता है. डॉक्टरों को इन ईयर गार्ड से इन परेशानियों से निजात मिलेगी.