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कोरोना वैक्सीन का वंडर! ठीक हो गई लोगों की कई दूसरी बीमारियां

प्रतीकात्मक तस्वीर
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कोरोना वायरस की वैक्सीन आने बाद से ना केवल इस खतरनाक वायरस को लेकर लोगों की चिंताएं कम हुई हैं बल्कि वैक्सीन की उपलब्धता ने दुनिया भर में लोगों को इस वायरस के खिलाफ लड़ने का हौसला भी दिया है. हालांकि ये वैक्सीन सिर्फ कोरोना वायरस ही नहीं बल्कि कई दूसरी बीमारियों को भी कंट्रोल करने में कारगर साबित हो रही है.

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इंग्लैंड में रहने वाली 72 साल की महिला जोआन पिछले छह महीनों से ठीक से चल नहीं पा रही थीं. दरअसल उनका घुटनों का ऑपरेशन हुआ था और इसके बाद उन्हें इंफेक्शन हो गया था जिसके चलते उनके पैर में काफी दर्द रहता था. हालांकि इस महीने एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन लगवाने के अगले दिन ही उनके पांव का दर्द पूरी तरह से खत्म हो चुका था.

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जोआन को अब उम्मीद है कि वे अब काम पर वापस लौट सकती हैं और उन्हें विश्वास नहीं हुआ कि कोरोना वैक्सीन के चलते उनकी इतनी गंभीर समस्या ठीक हो गई. लेकिन सिर्फ जोआन ही नहीं बल्कि कई ऐसे लोग हैं जो कोरोना वैक्सीन लगवाने के बाद से ही अपने स्वास्थ्य से जुड़ी कई समस्याओं को लेकर काफी बेहतर महसूस कर रहे हैं. एक दुर्लभ लाइम बीमारी से जूझने वाले शख्स ने भी कहा कि कोरोना वैक्सीन लगवाने के कुछ दिनों बाद ही वे ठीक हो गए. 

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एक शख्स ने ये भी बताया कि उसे खुजली की समस्या थी और कोरोना वैक्सीन लगवाने के कुछ घंटों बाद ही उसके हाथ और पांव पर खुजली के निशान रहस्यमयी तरीके से पूरी तरह से गायब हो चुके थे. वही एक महिला का कहना था कि वे पिछले 25 सालों से चक्कर आने की समस्या से संघर्ष कर रही थीं लेकिन वैक्सीन लगवाने के 4 दिनों बाद ही उनकी ये समस्या पूरी तरह से खत्म हो चुकी थी. 

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इसके अलावा एक महिला का कहना था कि उनके पति ने इस वैक्सीन का इस्तेमाल करने के बाद 15 सालों में पहली बार ठीक ढंग से नींद ली है. दरअसल इस महिला के पति को पिछले 15 सालों से स्लीप डिसऑर्डर था और वैक्सीन लगवाने के बाद उनकी इस परेशानी में काफी सुधार देखने को मिला.  कुछ लोगों का तो यहां तक भी कहना है कि कोरोना पॉजिटिव होने के बाद वे बेहतर महसूस कर रहे हैं हालांकि ऐसे लोगों की संख्या काफी कम है. 

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हालांकि ऐसा पहली बार नहीं है जब किसी वैक्सीन ने लोगों की कई हेल्थ समस्याओं को दूर करने में मदद की हो. इससे पहले 1970 के दशक में रूस के वैज्ञानिकों ने पाया था कि लोगों को पोलियो की वैक्सीन देने के चलते फ्लू से होने वाली मौतों में भी काफी कमी देखने को मिली थी. इसके अलावा 70 और 80 के दौर में डैनिश वैज्ञानिक पीटर आबे ने पाया था कि वेस्ट अफ्रीका में खसरे की वैक्सीन लगवाने के बाद इस समुदाय का बर्थ रेट बेहतर हुआ था और यहां जन्म के समय मरने वाले बच्चों की संख्या में कमी देखने को मिली थी.

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कुछ समय पहले ग्रीक और नीदरलैंड्स के रिसर्चर्स ने एक एक्सपेरिमेंट के तौर पर टीबी की वैक्सीन को कुछ लोगों को दिया था और इसके चौंकाने वाले परिणाम सामने आए थे. इस वैक्सीन को लेकर ये सामने आया था कि टीबी के साथ ही कैंसर और अल्जाइमर जैसी समस्या के लिए भी ये वैक्सीन फायदेमंद साबित हो सकती है.  

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वैज्ञानिक इस कॉन्सेप्ट पर रिसर्च कर रहे हैं लेकिन कुछ का कहना है कि वैक्सीन इंसान के इम्युन सिस्टम को मजबूत करती है जिसके चलते अक्सर कुछ वैक्सीन्स बाकी बीमारियों को लेकर भी फायदेमंद साबित होती हैं. हालांकि यूनिवर्सिटी ऑफ मैनचेस्टर की इम्युनोलॉजिस्ट प्रोफेसर शीना क्रोएकशैंक की इस मामले में अलग राय है. 

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शीना का कहना है कि इन वैक्सीन के सहारे ठीक हो रही हेल्थ समस्याओं का एक कारण ये भी हो सकता है कि इनमें से ज्यादातर लोगों को ये बीमारियां तब नहीं हुई जब ये युवा थे. खसरा, टीबी जैसी बीमारियां हमारे इम्युन सिस्टम को काफी नुकसान पहुंचा सकती हैं. हालांकि अब भी ये साफ नहीं है कि एक वैक्सीन कैसे कई लोगों की गंभीर हेल्थ परेशानियों के लिए कारगर साबित हो रही है.