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अमेरिका- ईरान में टेंशन से भारत को हो रहा ये बड़ा नुकसान, पाकिस्तान उठा सकता है फायदा

धान की खेती को नुकसान
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अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव का असर अब भारत के कारोबार पर भी पड़ने लगा है. दोनों देशों के बीच टेंशन की वजह से भारतीय चावल उद्योग और धान की खेती को नुकसान पहुंच रहा है. ईरान के साथ चावल के निर्यात पर ब्रेक लगने के बाद बासमती चावल उगाने वाले भारत के किसान और एक्सपोर्टर बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं. 

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एक चावल निर्यातक के मुताबिक दोनों देशों के तनाव की वजह से ईरान में 1800 करोड़ रुपये का पेमेंट अब तक अटका हुआ है. वहीं दूसरी तरफ निर्यात पर ग्रहण लग जाने की वजह से मंडियों में किसानों को चावल के सही दाम भी नहीं मिल रहे हैं.

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बता दें कि भारत के चावल का ईरान सबसे बड़ा उपभोक्ता है. देश में पैदा होने वाले बासमती चावल का करीब 35 फीसदी हिस्सा सिर्फ ईरान को निर्यात किया जाता है. बीते साल की ही बात करें तो भारतीय निर्यातकों और किसानों ने चौदह लाख मीट्रीक टन चावल ईरान को निर्यात किया था.

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ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर संघ के महासचिव पंकज गोयल ने बताया कि ईरान के साथ व्यापार में आई दिक्कतों का सबसे ज्यादा नुकसान चावल उद्योग को ही उठाना पड़ रहा है. मौजूदा समय में चावल के निर्यात में दो तिहाई तक की कमी आई है.
 

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सामान्य हालात में ईरान और भारत के बीच तेल के बदले चावल का सौदा होता था. अभी भारत ने ईरान से तेल आयात बंद कर दिया है जिससे चावल के निर्यात पर भी ग्रहण लग गया है. निर्यात बंद हो जाने की वजह से बासमती चावल की कीमतों में लगातार गिरावट जारी है. जिस पूसा 1121 धान से बासमती चावल बनाया जाता है वो इस साल 2700 रुपये क्विंटल बिक रहा जो बीते साल 3300 रुपये क्विंटल बिक रहा था. निर्यात बेहद कम होने की वजह से कीमतों में 600 रुपये प्रति क्विंटल तक की कमी आ गई है.
 

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ऐसी भी रिपोर्ट सामने आ रही है कि ईरान भारत की जगह अब पाकिस्तान से बासमती और अन्य चावलों के आयात का फैसला कर सकता है. अगर ऐसा होता है तो निश्चित तौर पर भारतीय कारोबारी और किसानों को इसका नुकसान उठाना पड़ेगा. इससे सरकार के विदेशी मुद्रा भंडार पर भी असर पड़ने की संभावना है.