मदारीहाट (Madarihat) पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार जिले का एक छोटा लेकिन महत्वपूर्ण कस्बा है. यह अलीपुरद्वार सबडिवीजन के मदारीहाट-बीरपाड़ा सीडी ब्लॉक के अंतर्गत आता है. यह क्षेत्र ग्राम पंचायत और जनगणना नगर दोनों रूपों में पहचाना जाता है.
यह कस्बा जलदापाड़ा नेशनल पार्क (Jaldapara National Park) के बाहरी इलाके में स्थित है. जलदापाड़ा नेशनल पार्क भारतीय एक सींग वाले गैंडे (Indian Rhinoceros) के लिए जाना जाता है. इसी वजह से मदारीहाट का नाम उत्तर बंगाल के पर्यटन मानचित्र में लंबे समय से जुड़ा हुआ है.
मदारीहाट का इलाका चाय बागानों, जंगलों, छोटी नदियों और पहाड़ी वातावरण से घिरा हुआ है. यहां अलग-अलग समुदायों और भाषाओं के लोग रहते हैं, जिससे इलाके की सामाजिक संरचना काफी विविध दिखाई देती है.
यह कस्बा स्थानीय लकड़ी के फर्नीचर के लिए भी पहचाना जाता है. आसपास के क्षेत्रों में लकड़ी से बने घरेलू सामान और फर्नीचर का काम लंबे समय से होता रहा है.
परिवहन के लिहाज से मदारीहाट रेलवे स्टेशन इस इलाके का मुख्य रेल केंद्र है. New Jalpaiguri-Alipurduar-Samuktala Road Line के ब्रॉड गेज में बदलने के बाद इस रेलवे लाइन की कनेक्टिविटी और बेहतर हुई. यह रेलमार्ग उत्तर बंगाल के जंगलों और चाय बागानों के बीच से गुजरता है.
मदारीहाट रेलवे स्टेशन से देश के कई बड़े शहरों के लिए ट्रेन संपर्क उपलब्ध है. यहां से दिल्ली, कोलकाता, रांची और पटना जैसे शहरों तक रेल सेवाएं जुड़ी हुई हैं. यही कारण है कि यह कस्बा उत्तर बंगाल के सीमावर्ती और पर्यटन क्षेत्रों के बीच एक महत्वपूर्ण संपर्क बिंदु माना जाता है.
मदारीहाट का स्थानीय जीवन मुख्य रूप से ग्रामीण और छोटे कस्बाई ढांचे पर आधारित है. यहां बाजार, रेलवे स्टेशन, पर्यटन गतिविधियां और आसपास के गांवों की आवाजाही मिलकर इस इलाके की दैनिक गतिविधियों को प्रभावित करती हैं.
उत्तर बंगाल के अन्य इलाकों की तरह यहां भी चाय बागान और जंगल स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार से जुड़े महत्वपूर्ण हिस्से माने जाते हैं.