कोलकाता पोर्ट (Kolkata Port), जिसे अब श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट (Syama Prasad Mookerjee Port) के नाम से जाना जाता है, भारत के पूर्वी हिस्से का सबसे पुराना और प्रमुख समुद्री बंदरगाह है. यह पोर्ट हुगली नदी के किनारे स्थित है और करीब दो शताब्दियों से अधिक समय से देश के व्यापार, उद्योग और सामरिक गतिविधियों का केंद्र बना हुआ है. 1870 में औपचारिक रूप से स्थापित यह पोर्ट ब्रिटिश काल में भारत का सबसे व्यस्त व्यापारिक केंद्र हुआ करता था.
कोलकाता पोर्ट का महत्व इसकी भौगोलिक स्थिति से भी बढ़ जाता है. यह पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत, नेपाल, भूटान और बांग्लादेश जैसे देशों के लिए व्यापारिक प्रवेश द्वार का काम करता है. यहां से कोयला, चाय, जूट, स्टील, ऑटोमोबाइल, मशीनरी और पेट्रोलियम उत्पादों का बड़े पैमाने पर आयात-निर्यात किया जाता है. पोर्ट में दो मुख्य डॉक सिस्टम हैं- कोलकाता डॉक सिस्टम (KDS) और हल्दिया डॉक कॉम्प्लेक्स (HDC)। HDC समुद्र के ज्यादा करीब होने के कारण बड़े जहाजों को संभालने में सक्षम है, जबकि KDS कोलकाता शहर के भीतर व्यापार का ऐतिहासिक केंद्र है.
पोर्ट का संचालन आधुनिक तकनीक, नेविगेशन सिस्टम और कुशल मरीन सेवाओं के साथ लगातार उन्नत किया जा रहा है. इसके अलावा, कोलकाता पोर्ट भारत का एकमात्र ऐसा बड़ा नदी बंदरगाह है, जो ज्वारभाटा पर आधारित संचालन प्रणाली के कारण अनूठा माना जाता है.
यह बंदरगाह क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ लाखों लोगों को रोजगार भी प्रदान करता है. लॉजिस्टिक्स, शिपिंग, वेयरहाउसिंग और परिवहन जैसे क्षेत्रों में इसका बड़ा योगदान है.
कोलकाता पोर्ट न केवल पश्चिम बंगाल बल्कि पूरे पूर्वी भारत की आर्थिक प्रगति में अहम भूमिका निभा रहा है. तेजी से बढ़ते व्यापार और आधुनिक अवसंरचना के साथ यह पोर्ट भविष्य में भी भारत के समुद्री व्यापार का महत्वपूर्ण स्तंभ बना रहेगा.
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