चंद्रिका देवी शक्ति पीठ (Chandrika Devi Shakti Peeth), उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के बख्शी का तालाब क्षेत्र में गोमती नदी के किनारे स्थित एक प्रमुख तीर्थस्थल है. यह मंदिर देवी दुर्गा के एक रूप, मां चंद्रिका देवी को समर्पित है. यहां सिर्फ लखनऊ ही नहीं, बल्कि आसपास के जिलों और दूसरे राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं. यह जगह धार्मिक महत्व के साथ-साथ एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल भी है.
मंदिर का उल्लेख प्राचीन धार्मिक ग्रंथों जैसे स्कंद पुराण और कर्म पुराण में मिलता है, जिससे इसकी ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता का अंदाजा लगाया जा सकता है. मान्यता है कि गोमती नदी के पास महिसागर संगम क्षेत्र में प्राचीन समय से नौ दुर्गाओं की पवित्र वेदियां एक पुराने नीम के पेड़ के भीतर सुरक्षित रही हैं. यह स्थान, जो पहले काठवारा के नाम से जाना जाता था, आज भी सिद्धपीठ के रूप में प्रसिद्ध है. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, जो भक्त यहां एक बार दर्शन करने आते हैं, वे बार-बार यहां खिंचे चले आते हैं.
कहा जाता है कि त्रेता युग में भगवान राम के भाई लक्ष्मण के पुत्र चंद्रकेतु अश्वमेध यज्ञ के दौरान इस क्षेत्र से गुजरे थे. रात के समय जब वे गोमती नदी के किनारे घने जंगल में रुके, तो उन्हें भय महसूस हुआ. तब उन्होंने अपनी माता उर्मिला से सीखे मंत्रों के साथ देवी की प्रार्थना की. उनकी प्रार्थना से प्रसन्न होकर देवी ने चंद्रमा जैसी उज्ज्वल रोशनी के साथ प्रकट होकर उनका भय दूर किया. इसी दिव्य प्रकाश के कारण इस स्थान का नाम “चंद्रिका” पड़ा और यहीं देवी की स्थापना हुई.है, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को भी संजोए हुए है।