आमलकी एकादशी (Amalaki Ekadashi) पर श्री हरि के पूजन का विशेष महत्व बताया गया है. कहते हैं कि इस दिन आंवले का उबटन, आंवले के जल से स्नान, आंवला पूजन, आंवले का भोजन और आंवले का दान करना चाहिए. हर साल कुल 24 एकादशी आती हैं. इनमें से एक फाल्गुन शुक्ल में आने वाली आमलकी एकादशी भी है. इसे आमलक्य एकादशी भी कहा जाता है. आमलकी का अर्थ आंवला होता है. इस साल आमलकी एकादशी 10 मार्च को मनाई जाएगी.
आंवले का वृक्ष भगवान विष्णु को बहुत प्रिय है. कहते हैं कि आंवले के वृक्ष में स्वयं भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का वास होता है. इसलिए आमलकी एकादशी पर श्री हरि के पूजन का विशेष महत्व बताया गया है.
आमलकी एकादशी के दिन पूजन से लेकर भोजन तक हर कार्य में आंवले का उपयोग होता है. इस दिन सुबह स्नानादि के बाद भगवान विष्णु का ध्यान करें और व्रत का संकल्पलें. इसके बाद स्नान आदि से निवृत्त होकर भगवान विष्णु की पूजा करें. भगवान के सामने घी का दीपक जलकार विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें.पूजा के बाद आंवले के वृक्ष के नीचे नवरत्न युक्त कलश स्थापित करना न भूलें. यदि आंवले का वृक्ष उपलब्ध न हो तो श्री हरि को आंवला अर्पित कर दें.
Rangbhari Ekadashi 2026: आज 27 फरवरी को महादेव और श्रीहरि विष्णु की कृपा पाने का महासंयोग है. जानें शुभ मुहूर्त, संपूर्ण पूजा विधि और वो अचूक उपाय जो आपकी हर मनोकामना पूरी करेंगे.
Rangbhari Ekadashi 2026: 27 फरवरी को रंगभरी एकादशी मनाई जा रही है. इस दिन तुलसी का एक छोटा सा उपाय आपकी सोई हुई किस्मत जगा सकता है, लेकिन भूलकर भी न करें ये 1 गलती वरना पछताना पड़ सकता है.
Rangbhari Ekadashi 2026: इस रा रंगभरी एकादशी 27 फरवरी को मनाई जाएगी. इस दिन सुबह उठकर भगवान विष्णु का ध्यान कर व्रत का संकल्प करना चाहिए. इसके बाद स्नान आदि से निवृत्त होकर भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए. पूजा के दौरान आंवले का फल भगवान विष्णु को प्रसाद के रूप में चढ़ाएं. आंवले के वृक्ष की पूजा करें फिर किसी गरीब व्यक्ति या ब्राह्मण को भोजन कराना चाहिए.
Amalaki Ekadashi 2026 Date: 27 फरवरी 2026 को आमलकी एकादशी का व्रत रखा जाएगा. इस दिन 4 शुभ योग बन रहे हैं. जानें सही मुहूर्त, पारण समय, पूजा विधि, व्रत कथा और इस दिन क्या करें और क्या न करें.
14 जनवरी को साल की पहली एकादशी, षटतिला एकादशी आने वाली है. शायद आपको मालूम न हो, लेकिन लेकिन इस एकादशी का नाम हिंदू कैलेंडर की सबसे प्रमुख एकादशियों में शुमार है. आइए आपको साल 2026 में आने वाली पांच सबसे बड़े एकादशियों के बारे में बताते हैं.
रंगभरी एकादशी फाल्गुन शुक्ल पक्ष की एकादशी है जो वाराणसी में विशेष महत्व रखती है. इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती के साथ होली की शुरुआत होती है. शिव जी का विशेष श्रृंगार किया जाता है और उन पर रंग, अबीर और गुलाल चढ़ाया जाता है. वाराणसी में 6 दिन तक रंग खेलने का उत्सव चलता है. देखें वीडियो.
Rangbhari Ekadashi 2025: इस बार 10 मार्च को रंगभरी एकादशी मनाई जाएगी. फाल्गुन शुक्ल-एकादशी को काशी में रंगभरी एकादशी कहा जाता है. इस दिन भोले की नगरी काशी में मां पार्वती के स्वागत के रूप में मनाया जाता है. इस दिन बाबा विश्वनाथ का विशेष श्रृंगार होता है.