अयातुल्लाह अलीरेजा अराफी (Alireza Arafi) ईरान के प्रमुख शिया धर्मगुरु, शिक्षाविद और नीतिनिर्माण से जुड़े प्रभावशाली चेहरों में गिने जाते हैं. अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद ईरान ने संविधान का अनुच्छेद 111 लागू कर तीन सदस्यीय अंतरिम परिषद बना दी, जिसमें राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन, न्यायपालिका प्रमुख घोलामहोसैन मोहसिनी एजई और गार्जियन काउंसिल से चुने गए अयातुल्लाह अलीरेजा अराफी शामिल हैं. यह परिषद स्थायी सुप्रीम लीडर चुने जाने तक देश की पूरी कमान संभालेगी.
अलीरेजा अराफी का जन्म 1959 में ईरान में हुआ. कम उम्र से ही उन्होंने इस्लामी अध्ययन की राह पकड़ी और पारंपरिक धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ समकालीन विषयों में भी रुचि दिखाई. वे अरबी भाषा, इस्लामी न्यायशास्त्र (फ़िक़्ह) और दर्शन के जानकार माने जाते हैं.
अराफी का सबसे अहम योगदान क़ुम स्थित हौजा (इस्लामी धार्मिक शिक्षण संस्थान) के आधुनिकीकरण और वैश्विक विस्तार में माना जाता है. वे “हौजा इल्मिया क़ुम” की उच्च परिषद से जुड़े रहे और लंबे समय तक उससे संबंधित प्रशासनिक व शैक्षिक सुधारों का नेतृत्व किया. उनके कार्यकाल में पाठ्यक्रमों में संरचनात्मक बदलाव, शोध पर जोर और अंतरराष्ट्रीय छात्रों की भागीदारी बढ़ाने की पहल हुई. वे इस्लामी शिक्षा को वैश्विक संदर्भ में प्रासंगिक बनाने के पक्षधर रहे हैं.
अमेरिका और इजरायल के हमले में ईरान में सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई. खामेनेई के बाद अयातुल्लाह अलीरेजा अराफी को अंतरिम सुप्रीम लीडर नियुक्त किया गया है. देखें वीडियो.