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संजय सिन्हा की कहानी: मौन की महिमा समझने वाला फंसता नहीं

मेरे एक मित्र की पत्नी अक्सर मुझसे कहती हैं कि वो दफ्तर या घर में अगर कुछ भी बोलती हैं तो फंस जाती हैं. फंस जाने से मतलब है कि उनके कुछ भी कहने को लोग अन्यथा ले लेते हैं और फिर वो विवादों में आ जाती हैं. ये तो बहुत छोटी सी बात थी जो मेरे मित्र की पत्नी से मुझसे साझा की, ऐसे बहुत से लोग होते हैं जो बहुत अच्छे होते हैं लेकिन सिर्फ बोलने की वजह से फंस जाते हैं. देखें- 'संजय सिन्हा की कहानी' का ये पूरा वीडियो.

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