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संजय सिन्हा की कहानी: मन का भाव है खुशी

पिछले दिनों ऑफिस में मेरा प्रमोशन हो गया. हालांकि मेरे पद का नाम कार्यकारी संपादक पहले से है और कुछ साल पहले तक पत्रकारिता की दुनिया में इसके ऊपर किसी प्रमोशन की गुंजाइश नहीं होती थी. जब मैं जनसत्ता में उप संपादक बना था, तभी मुझे बता दिया गया था कि संपादक बन पाना असंभव होता है. तब किसी अखबार, किसी न्यूज़ चैनल में एक ही संपादक होता था. देखें- ये पूरा वीडियो.

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