अपने आखिरी समय में रावन ने लक्ष्मण को दो सीख दिया था. पहला ये कि किसी सड़े रिश्ते को मत ढोओ. उससे वैसे भी अलग होना तो आज ही अलग हो जाओ. काल करे सो आज कर और दूसरी सीख ये कि अपना राज कभी किसी से साझा मत करो. रावण ने कहा कि मेरी नाभी में मेरा प्राण बसता है, ये राज विभीषण के अलावा कोई नहीं जानता था. अगर विभीषण ने नहीं बताया होता तो राम कभी रावण को नहीं मार पाते.