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जुबां नहीं, इंसान का मन गंदा होता है...

जुबां नहीं, इंसान का मन गंदा होता है...

मन को हम जैसा चाहने देते हैं, मन वैसा ही चाहने लगता है. मन ही भाव है और खुशी का आधार है. सभी रिश्ते-नाते मन के भाव पर टिके रहते हैं. रोना, हंसना, खुश या दुखी रहना यह सब इंसान के मन पर निर्भर करता है. संजय सिन्हा से सुनें मन के इसी भाव की कहानी.

sanjay sinha ki kahani episode of 10th february 2016 on human mind

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