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संजय सिन्हा की कहानी: खुशियों को वही जीते हैं, जो जीना जानते हैं

संजय सिन्हा की कहानी: खुशियों को वही जीते हैं, जो जीना जानते हैं

फिल्म का नाम था 'नमक हलाल', जब ये फिल्म आई थी, मैं स्कूल में पढ़ता था. अमिताभ बच्चन की फिल्म मैं जरूर देखता था. पिताजी भी मना नहीं करते थे. वो जानते थे कि उनका बेटा जिंदगी का पाठ स्कूल-कॉलेज से नहीं, सिनेमा की कहानियों से सीखेगा. वो जानते थे कि हर कहानी बुराई पर अच्छाई की जीत की ही होती है. देखें- 'संजय सिन्हा की कहानी'; का ये पूरा वीडियो.

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