वैसे तो चुटकुले हंसाने के लिए होते हैं, लेकिन मैं कई चुटकुलों को सुन कर दुखी हो जाता हूं. आज मैं एक ऐसा ही चुटकुला आपको सुनाने जा रहा हूं, जिसे सुन कर बहुत से लोग मुस्कुराते हैं, हंसते हैं, पर मैं उदास हो जाता हूं.पहले आप चुटकुला सुन लीजिए, फिर कहानी आगे बढ़ेगी. चुटकुला पुराना है और घूम-फिर कर 108 बार आप तक पहुंच चुका होगा. फिर भी सुनिए, क्योंकि संजय सिन्हा जब चुटकुला सुनाते हैं तो वो चुटकुला नहीं, दर्शन होता है. “एक बार एक बच्चा अपने घर से ढेर सारी खीर ले कर स्कूल गया. दोपहर के भोजन के समय उसने खीर मास्टर साहब को दे दी और कहा कि मां ने आपको देने के लिए कहा है. मास्टर साहब बहुत खुश हुए. उन्होंने पेट भर कर खीर खाई और पूछा कि बेटा, मां ने आज मेरे लिए खीर क्यों भिजवाई?जाने क्या हुआ इस चुटकुले में आगे...साथ ही जानें संजय सिन्हा ने इस कहानी से कि क्यों दूसरों के साथ वैसा नहीं करना चाहिए, जो हमें खुद के लिए पंसद नहीं....