सभी कहते हैं कर्म करो, सब अच्छा होगा, बस थोड़ा सा सब्र रख लेना. लेकिन इंसान कर्म हर बार अकेला नहीं करता. उसके आस-पास भी लोग होते हैं, माहौल होता है, उसकी संगति होती है. इंसान अक्सर इसी माहौल, संगति के हिसाब से ढल जाता है. इसलिए कर्म करने के लिए सही संगति होना भी जरूरी है.