मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और युद्ध का असर अब भारत के किचन तक दिखने लगा है. कच्चे तेल और गैस की सप्लाई पर असर पड़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है, जिसका असर LPG के दामों पर भी पड़ा है.
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए ग्लोबल सिचुएशन का असर घरेलू गैस पर जल्दी दिखता है. हाल ही में घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत में करीब ₹60 की बढ़ोतरी की गई, जिसके बाद कई शहरों में 14.2 किलो वाले सिलेंडर की कीमत लगभग ₹900 के आसपास पहुंच गई.
ब्लैक में डबल कीमत मेें मिल रहा गैस सिलेंडर
कीमत बढ़ने के साथ ही कई जगहों पर गैस की ब्लैक मार्केटिंग और कमर्शियल इस्तेमाल की शिकायतें आने लगी हैं. देश भर के कई राज्यों में गैस सिलेंडर आउट ऑफ स्टॉक हो गए हैं और कालाबाजारी बढ़ने लगी है.
ब्लैक में कई जगहों पर सिलेंडर डबल प्राइस तक में बेचा जा रहा है. आम तौर पर जब भी लॉकडाउन या मिडिल ईस्ट में वॉर जैसे हालात होते हैं तो कालाबाजरी करने वाले सिलेंडर का स्टॉक जमा कर लेते हैं महंगे में बेचते हैं.
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बिना गैस के कैसे बनेगा खाना?
ऐसे हालात में कई लोग अब यह सोचने लगे हैं कि क्या गैस सिलेंडर के बिना भी किचन चलाया जा सकता है. भारत में किचन का सबसे बड़ा खर्च अक्सर गैस सिलेंडर होता है.
अगर एक परिवार हर महीने एक सिलेंडर इस्तेमाल करता है तो साल भर में सिर्फ कुकिंग पर करीब ₹10,000 से ₹11,000 तक खर्च हो सकता है. ऐसे में कई लोग ऐसे विकल्प तलाश रहे हैं जिससे गैस पर निर्भरता कम की जा सके.
दिलचस्प बात यह है कि टेक्नोलॉजी की वजह से अब ऐसा करना पहले से ज्यादा आसान हो गया है. बाजार में कई ऐसे इलेक्ट्रिक किचन गैजेट्स मौजूद हैं जिनकी मदद से रोज का खाना गैस के बिना भी बनाया जा सकता है.
थोड़ी समझदारी से खरीदारी की जाए तो करीब ₹5000 के बजट में एक छोटा Gas-Free Kitchen तैयार किया जा सकता है. हालांकि आप थोड़े पैसे ज्यादा लगाएंगे तो 10 से 20 हजार रुपये तक के बजट में आप पूरी तरह गैस फ्री किचन भी बना सकते हैं वो भी हाई टेक इक्विप्मेंट्स के साथ जिससे आपकी LPG सिलेंडर डिपेंडेंसी ही खत्म हो जाएगी.
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क्यों बढ़ रही है Gas-Free Kitchen की चर्चा
भारत में LPG की कीमतें अंतरराष्ट्रीय तेल और गैस बाजार पर निर्भर करती हैं. इसलिए ग्लोबल तनाव या सप्लाई की समस्या का असर सीधे घरेलू गैस के दाम पर पड़ता है. यही वजह है कि हाल के वर्षों में LPG की कीमतों में कई बार बदलाव देखने को मिला है.
इसी बीच एक्सपर्ट्स भी अब इलेक्ट्रिक कुकिंग की तरफ बढ़ने की सलाह दे रहे हैं. कई एनर्जी रिपोर्ट्स में कहा गया है कि कई शहरों में बिजली से खाना बनाना LPG से सस्ता पड़ सकता है, खासकर तब जब बिजली की दरें कम हों और गैस सब्सिडी सीमित हो.
यानी आने वाले समय में किचन में गैस के साथ-साथ इलेक्ट्रिक कुकिंग का इस्तेमाल तेजी से बढ़ सकता है.
₹5000 में कैसे तैयार हो सकता है Gas-Free Kitchen
अगर किसी घर में गैस सिलेंडर की जगह टेक गैजेट्स का इस्तेमाल करना हो तो तीन छोटे उपकरण काफी काम आ सकते हैं.
इंडक्शन कुकटॉप - 1500-2000 रुपये
सबसे पहला गैजेट है इंडक्शन कुकटॉप. यह आज शहरों में LPG का सबसे बड़ा विकल्प बनता जा रहा है. इसमें बिजली से सीधे बर्तन गर्म होता है, इसलिए हीट का नुकसान कम होता है और खाना जल्दी बनता है.
बाजार में अच्छे इंडक्शन कुकटॉप करीब ₹1500 से ₹2500 के बीच मिल जाते हैं. मार्केट में महंगे ऑप्शन भी हैं, लेकिन यहां हम सबसे कम कीमत पर बेस्ट ऑप्शन्स बता रहे हैं.
इलेक्ट्रिक राइस कूकर या मल्टी कुकर - 1200-1800 रुपये
दूसरा डिवाइस है इलेक्ट्रिक राइस कुकर या मल्टी कुकर. इसमें चावल, दाल, खिचड़ी और कई तरह की सब्जियां आसानी से बन जाती हैं. इसकी कीमत आमतौर पर ₹1200 से ₹1800 के बीच होती है और यह छोटे परिवारों या अकेले रहने वालों के लिए काफी काम का उपकरण है.
इलेक्ट्रिक केतली - 500-800 रुपये
तीसरा उपकरण है इलेक्ट्रिक केतली या छोटा हॉट प्लेट. यह पानी उबालने, चाय या इंस्टेंट खाना बनाने में काम आता है. इसकी कीमत अक्सर ₹500 से ₹800 के बीच होती है.
अगर इन तीनों को मिलाकर देखा जाए तो कुल खर्च करीब ₹3500 से ₹5000 के बीच आता है. यानी एक बार का छोटा निवेश करके गैस सिलेंडर पर निर्भरता काफी हद तक कम की जा सकती है.
बिजली से खाना बनाना कितना महंगा पड़ता है?
कई लोगों के मन में सवाल होता है कि बिजली से कुकिंग करने पर बिल कितना बढ़ेगा. भारत के कई राज्यों में घरेलू बिजली का रेट लगभग ₹4 से ₹8 प्रति यूनिट के बीच होता है.
अगर एक 2000 वॉट का इंडक्शन कुकटॉप रोज करीब दो घंटे इस्तेमाल किया जाए तो महीने में लगभग 100 से 120 यूनिट बिजली खर्च हो सकती है. ऐसे में बिजली बिल लगभग ₹600 से ₹900 के बीच आ सकता है.
तुलना करें तो कई शहरों में एक घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत करीब ₹900 के आसपास है. यानी कई मामलों में बिजली से कुकिंग का खर्च गैस जितना या उससे थोड़ा कम भी पड़ सकता है. हालांकि यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि घर में कितनी कुकिंग होती है और बिजली का रेट कितना है.
क्या फ्यूचर में में गैस-फ्री किचन आम हो सकता है?
अभी भारत के ज्यादातर घरों में LPG ही मुख्य कुकिंग फ्यूल है. लेकिन शहरों में धीरे-धीरे इलेक्ट्रिक कुकिंग गैजेट्स का इस्तेमाल बढ़ रहा है. इंडक्शन, एयर फ्रायर, इलेक्ट्रिक कुकर और माइक्रोवेव जैसे डिवाइसेज अब आम होते जा रहे हैं.
एनर्जी एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर बिजली की कीमतें स्थिर रहती हैं और उपकरण सस्ते होते हैं तो आने वाले वर्षों में Gas-Free Kitchen एक नया ट्रेंड बन सकता है, जिससे किचन में गैस पर निर्भरता कम हो सकती है.