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अमेरिकी लोगों के साथ साइबर ठगी, भारत से जुड़े तार, FBI ने किया बड़ा खुलासा

अमेरिका में दो टेलीकम्युनिकेशन सर्विस के दो पूर्व अधिकारियों ने आरोप स्वीकार कर लिया हैं. उनपर आरोप था कि वह ऐसी कंपनियों को टेक सपोर्ट दे रहे थे, जो लोगों को ठगने के काम में शामिल थे. अमेरिकी जांच एजेंसी FBI ने बताया है कि इसमें भारतीय कनेक्शन भी शामिल हैं. आइए इसके बारे में डिटेल्स में जानते हैं.

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अब FBI कर रही इन घटनाओं की जांच (AP Photo)
अब FBI कर रही इन घटनाओं की जांच (AP Photo)

FBI की जांच के बाद आरोपियों ने अपने आरोपों को स्वीकार कर लिया है और उनका कनेक्शन भारत स्थित कंपनियों से भी था. अमेरिका में दो टेलीकम्युनिकेशन सर्विस के दो पूर्व अधिकारियों ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को उन्होंने स्वीकार कर लिया.

उनपर गंभीर आरोप लगे थे कि वे ऐसे कंपनियों को सर्विस दे रहे थे, जिनके बारे में उनको पता था कि वह ठगी का काम कर रहे हैं. उन्होंने अमेरिका और अन्य देशों में मौजूद लोगों को भी निशाना बनाया. 

गिरफ्तार किए गए फ्लोरिडा के मियामी निवासी 42 साल के पूर्व CEO एडम यंग और नेवादा के लास वेगास निवासी 33 साल के पूर्व CSO हैरिसन गेवीर्ट्ज हैं. 

दोनों ने माना है कि वे ऐसी कंपनी चला रहे थे, जो उन कस्टमर्स को टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइड करा रहे थे, जिनके बारे में उनको पता था कि वे टेक सपोर्ट फ्रॉड ऑपरेशन में शामिल हैं और लोगों से ठगी कर रहे थे.

16 जून को सुनाई जाएगी सजा 

दोनों दोषियों ने अमेरिकी संघीय कानून के तहत गंभीर अपराध की जानकारी छिपाने के आरोप में दोष स्वीकार किया है. अब उन लोगों को सजा 16 जून 2026 को सुनाई जाएगी. 

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भारत से जुड़े फ्रॉड नेटवर्क का हुआ खुलासा

अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, इस मामले की जांच 2020 में शुरू हुई थी. जांच के बाद भारत में बैठे पांच टेलीमार्केटिंग साइबर ठग और कंपनी के एक कंपनी के एक पूर्व कर्मचारी को दोषी ठहराया है. 

भारतीयों को भी दोषी पाया है 

भारतीय नागरिक साहिल नरंग, चिराग सचदेवा, अबरार अंजुम और मनीष कुमार को भी मामले में दोषी पाया है. इन लोगों पर आरोप है कि इन्होंने अमेरिका के नागरिकों और अन्य देशों के लोगों को खासकर बुजुर्गों और कमजोर वर्ग के लोगों से करोड़ों डॉलर की ठगी की. 

वायरस का डर दिखाकार लोगों को बनाया शिकार 

कोर्ट के डॉक्यूमेंट के मुताबिक, साल 2016 से 2022 के बीच यंग और गेवीर्ट्ज को पता था कि उनके कुछ कस्टमर्स टेक सपोर्ट स्कैम्स में शामिल हैं. 

स्कैम की शुरुआत एक नकली पॉपअप के साथ होती, जिसमें दावा किया जाता कि सिस्टम में वायरल ये खतरनाक मैलवेयर से संक्रमित है. इसके बाद लोगों को एक फोन नंबर पर कॉल करने को कहा था, जो फर्जी कॉल सेंटर्स से कनेक्ट था. 

कॉल सेंटर्स में बैठे एजेंट लोगों को सैकड़ों डॉलर देकर नकली या गैर जरूरी टेक्निकल सपोर्ट सर्विस खरीदने के लिए राजी कर लेते. कुछ केस में आरोप हैं कि एजेंट्स ने विक्टिम के कंप्यूटर या डिवाइस का रिमोट एक्सेस कर लिया और बैंक डिटेल्स समेत कई पर्सनल जानकारी को चुरा लिया. 

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ट्यूनीशिया में कॉल सेंटर चलाने का आरोप

जांच एजेंसियों को यह भी पता चला कि यंग और गेवीर्ट्ज ने 2016 से अप्रैल 2022 के बीच ट्यूनीशिया में एक कॉल सेंटर चलाया. जहां कुछ कर्मचारी टेक सपोर्ट स्कीम्स के बारे में शामिल थे. आरोप है कि कंपनी के कर्मचारियों को ऐसे ग्राहकों को सर्विस सेवाएं का ऑर्डर दिया, जो टेक सपोर्ट फ्रॉड में शामिल थे. 

FBI बोला- बुजुर्गों और कमजोरों को बनाया था निशाना 

जांच एजेंसी FBI के बोस्टन डिविजन के स्पेशल एजेंट इन चार्ज टेड ई. डॉक्स ने इस मामले की कड़ी निंदा की है. उन्होंने आगे कहा कि आरोपियों ने जानबूझकर टेलीमार्केटिंग और टेक सपोर्ट स्कैमर्स से मुनाफा कमाया है. इन लोगों ने बुजुर्गों और कमजोर लोगों को शिकार बनाया और उनकी जिंदगीभर की कमाई ठग ली है. 

डॉक्स ने आगे बताया है कि बीते साल टेक सपोर्ट स्कैम्स के चलते अमेरिकियों को 2.1 अरब डॉलर का नुकसान हुआ है. अभी सिर्फ रोड आइलैंड के लोगों ने कम से कम 5.7 मिलियन डॉलर की ठगी की शिकायत दर्ज कराई. 

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