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साइबर अटैक और डिजिटल इंडियाः क्या हम तैयार हैं?

तेजी से डिजिटल होते भारत में सायबर अटैक से खलबली मचने लगी है. सायबर सिक्योरिटी को लेकर तमाम प्रश्न खड़े किए जाने लगे हैं. जानें कितना तैयार हैं हम.

प्रतीकात्मक फोटो प्रतीकात्मक फोटो

कुछ समय पहले 'वानाक्राई रैनसमवेयर' साइबर अटैक ने दुनिया भर में तबाही मचाई थी. अब आज की खबर है कि इसी तरह के अटैक ने भारत समेत बाकी देशों को अपने चपेट में ले लिया है. इस अटैक के चलते भारत के सबसे बड़े मुंबई स्थित कंटेनर पोर्ट जवाहर लाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट (JNPT) समेत दुनिया की 20 बड़ी कंपनियों का कामकाज ठप हो गया. इस साइबर हमले की चपेट में एपी मोलर मार्सक भी है, जो JNPT स्थित गेटवे टर्मिनल इंडिया (GTI) को ऑपरेट करता है.

साइबर अटैक का सबसे ज्यादा यूक्रेन में हुआ, जहां सरकारी मंत्रालयों, बिजली कंपनियों और बैंक के कंप्यूटर सिस्टम में बड़ी खराबी आई है. दुनिया भर में साइबर हमले की चपेट में आई कंपनी एपी मॉलर-मैर्स्क (AP Moller-Maersk) ही भारत में JNPT पर गेटवे टर्मिनल्स इंडिया (GTI ) का संचालन करती है, जिसकी क्षमता 18 लाख स्टैंडर्ड कन्टेनर यूनिट की है. इससे पहले पिछले महीने हुए साइबर हमले में दुनिया के तीन लाख से ज्यादा कंप्यूटर चपेट में आए थे.

ऐसे समय में जब भारत डिजिटल होने की तरफ बढ़ रहा है एक जरुरी प्रश्न हमारा ध्यान अपनी तरफ खिंचती है, कि क्या हम सायबर अटैक से लड़ने के लिए तैयार हैं? पिछले साल नवंबर में जब देश के मुखिया ने नोटबंदी का ऐलान किया था उसके बाद से ही कैशलेस इकोनॉमी को बढ़ावा दिया जा रहा है. डिजिटल वॉलेट का चलन बढ़ गया. पेटीएम जैसी कंपनियां तमाम फीचर्स मुहैया कराने लगी जिससे आसानी से ऑनलाइन ट्रांजैक्शन किया जा सके. लेकिन भारत एक देश है जहां लोग अब भी डिजिटल रुप से काफी शिक्षित नहीं है.

हम बात केवल शहरों की नहीं कर रहे हैं. भारत के छोटे शहरों में भी ऑनलाइन वॉलेट का इस्तेमाल बढ़ रहा है. यहां लोग इसे इस्तेमाल तो कर लेते हैं लेकिन इन्हें सुरक्षा की दृष्टि पर्याप्त डिजिटल ज्ञान नहीं होता. भारत में आजकल लगभग सारे डेटा को डिजिटल रुप दिया जा रहा है. आधार कार्ड से सारे कामकाजों को लिंक किया जा रहा है. लेकिन जब वानाक्राई रैनसमवेयर अटैक ने दुनियाभर को अपना निशाना बनाया था तब ये बात सामने आई थी कि विंडोज XP पुराने ऑपरेटिंग सिस्टम पर ये अटैक किया गया है. क्योंकि इन सिस्टम्स को आसानी से हैक किया जा सकता है. भारत में काफी सारी जगहें ऐसी हैं जहां पुराने ऑपरेटिंग सिस्टम का इस्तेमाला धड़ल्ले से किया जा सकता है. तो प्रश्न ये कि क्या हम भविष्य में ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए तैयार हैं?

बात सिर्फ यहीं पर खत्म नहीं होती. सायबर फ्रॉड की वारदातें भी आए दिन सुर्खियों में बनी रहती है. ऐसे में डिजिटल होना तो अपनी जगह ठीक है लेकिन सुरक्षा के लिहाज से अभी भी बहुत काम करने की जरुरत है. क्योंकि बिना सायबर सिक्टोरिटी के डिजिटल भारत की कल्पना करना बहुत मुश्किल है. सुरक्षा के पुख्ता इंतजान नहीं किए गए तो ऑनलाइन मौजूद सभी दस्तावेजों, बैंक डिटेल्स और गोपनियता में कभी भी सेंध लग सकती है.

 

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