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Exclusive: भारत की अदिति चौहान ने रचा इतिहास

भारतीय फुटबॉल टीम की गोलकीपर अदिति चौहान फिर एक बार दुनियाभर में सुर्खियों में हैं. मैनुअल नोएर को अपना रोल मॉडल मानने वाली यूपी की अदिति ने महज 22 साल की उम्र में ही अपनी स्टॉपिंग पावर के दम पर 'द एशियन फुटबॉल अवॉर्ड' जीत लिया. वह ऐसा करने वाली पहली भारतीय फुटबॉलर बन गई हैं. उन्होंने इंग्लिश प्रीमियर लीग की वेस्ट हैम यूनाइटेड के लिए अपने पहले ही सीजन में तमाम दिग्गजों को पीछे छोड़ते हुए ये बड़ा अवॉर्ड अपने नाम किया. इसी साल अगस्त में ही अदिति इंग्लिश प्रीमियर लीग में जगह बनाने वाली पहली भारतीय फुटबॉलर बनी थीं. अदिति की इस कामयाबी पर उनसे बात की सूरज पांडेय ने.

द एशियन फुटबॉल अवॉर्ड के साथ गोलकीपर अदिति चौहान द एशियन फुटबॉल अवॉर्ड के साथ गोलकीपर अदिति चौहान

भारतीय फुटबॉल टीम की गोलकीपर अदिति चौहान फिर एक बार दुनियाभर में सुर्खियों में हैं. मैनुअल नोएर को अपना रोल मॉडल मानने वाली यूपी की अदिति ने महज 22 साल की उम्र में ही अपनी स्टॉपिंग पावर के दम पर 'द एशियन फुटबॉल अवॉर्ड' जीत लिया. वह ऐसा करने वाली पहली भारतीय फुटबॉलर बन गई हैं. उन्होंने इंग्लिश प्रीमियर लीग की वेस्ट हैम यूनाइटेड के लिए अपने पहले ही सीजन में तमाम दिग्गजों को पीछे छोड़ते हुए ये बड़ा अवॉर्ड अपने नाम किया. इसी साल अगस्त में ही अदिति इंग्लिश प्रीमियर लीग में जगह बनाने वाली पहली भारतीय फुटबॉलर बनी थीं. अदिति की इस कामयाबी पर उनसे बात की सूरज पांडेय ने.

दिल्ली आने के साथ शुरू हुआ फुटबॉल का सफर
मूल रूप से यूपी की रहने वाली अदिति के पैरेंट्स जब सालों पहले दिल्ली शिफ्ट हुए तो बास्केटबॉल और कराटे की अच्छी प्लेयर अदिति को जैसे उड़ने के लिए खुला आसमान मिल गया. दिल्ली आने के बाद अदिति ने फुटबॉल खेलना शुरू किया और एक बार खेलना शुरू करने के बाद इस शॉट स्टॉपर ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और दिल्ली के साथ ही इंडिया की भी जूनियर टीमों से होते हुए टीम इंडिया की गोलकीपर बन गई. अदिति के करियर में बड़ा मोड़ उस वक्त आया जब उन्होंने ग्रेजुएशन के बाद आगे की पढ़ाई के लिए यूके की लॉन्जबर्ग यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया.

पढ़ाई के साथ ही फुटबॉल भी खेल रही हैं अदिति
लॉन्जबर्ग में पढ़ने आई अदिति वीकेंड पर बोर हो जाती थीं. इस बोरियत से बचने के लिए वो आस-पास हो रहे फुटबॉल मैचों को देखने पहुंच जाती थी. ऐसे ही एक दिन अदिति की दोस्त ने उन्हें प्रीमियर लीग के लिए ट्रायल देने को कहा. स्वभाव से शर्मीली अदिति ने पहले तो मना किया लेकिन कई बार कहने के बाद आखिरकार अदिति मान गईं और वेस्ट हैम यूनाइटेड लेडीज के लिए ट्रायल दे ही दिया. बकौल अदिति, 'मैं वीकेंड्स पर कभी ट्रायल वगैरह दे देती थी. ऐसे ही एक ट्रायल के बाद मेरा सेलेक्शन यहां हो गया.' बस फिर क्या था वेस्ट हैम यूनाइटेड लेडीज ने टैलेंट से भरी इस इंडियन गोली को अपने साथ जोड़ने में जरा भी देर नहीं की.

पहले ही सीजन में हुईं अवॉर्ड के लिए नॉमिनेट
शुरुआत में अदिति वेस्ट हैम की सेकेंड च्वाइस गोलकीपर थी. दरअसल क्या है ना, हम शर्मीले भारतीय अपना असली टैलेंट जरा देर से दिखाते हैं. लेकिन जब दिखाते हैं तो प्रतिस्पर्धा लगभग खत्म ही कर देते हैं. ठीक इसी तरह अदिति ने जब अपना टैलेंट दिखाया तो वेस्ट हैम यूनाइटेड ने उन्हें अपना फर्स्ट गोलकीपर बनाने में जरा भी देर नहीं की. वेस्ट हैम की फर्स्ट च्वाइस गोलकीपर बनने के बाद सेल्फ मोटीवेशन से आगे बढ़ने वाली इस लड़की ने इस सीजन में इतना जबरदस्त खेल दिखाया कि 'द एशियन फुटबॉल अवॉर्ड' के आयोजनकर्ताओं ने उन्हें इस साल के अवॉर्ड के लिए नॉमिनेट कर लिया. अदिति कहती हैं, 'मैंने कभी इतना सब हासिल करने का सपना तो नहीं देखा लेकिन हां मैंने मेहनत बहुत की है. और पूरी तरह से पॉजिटिव रहते हुए मैंने गेम को अपना 100 परसेंट दिया है. और उसी का नतीजा है कि मैं यहां हूं.'

सीनियर प्लेयर्स को पीछे छोड़कर रचा इतिहास
द. एशियन फुटबॉल अवॉर्ड हर साल उस एशियन मूल के प्लेयर को मिलता है जो पूरे सीजन में सारे एशियन प्लेयर्स से अच्छा खेल दिखाता है. इस अवॉर्ड के लिए शॉर्टलिस्टेड लोगों में अदिति के साथ ही पिछले कुछ सालों से ब्रिटेन में खेल रही फुलहम लेडीज टीम की भारतीय मूल की ब्रिटिश फुटबॉलर तन्वी हंस भी थीं. तन्वी और अदिति के अलावा इस लिस्ट में भारतीय मूल की एक और प्लेयर मोनिका शर्मा (फुलहम लेडीज) के साथ ही लंदन बारी एफसी की कप्तान सबा महमूद भी थीं. यूके में अपना पहला सीजन खेल रही अदिति ने इन तीनों अनुभवी खिलाड़ियों को पीछे छोड़ते हुए ये अवॉर्ड अपने नाम किया.

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