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फेडरर के सामने दिखाया दम, मां बोलीं- ये हैं सुमित नागल के आदर्श

सुमित नागल ने इस मुकाबले का पहला सेट 6-4 से जीतकर फेडरर को ही नहीं, टेनिस जगत को चौंकाया. 22 साल के सुमित ने 38 साल के तजुर्बेकार फेडरर को जोरदार टक्कर दी.

Sumit Nagal Sumit Nagal

यूएस ओपन में स्विजरलैंड के दिग्गज टेनिस स्टार और 20 बार के ग्रैंड स्लैम विजेता रोजर फेडरर को पहला सेट हराकर भारत के युवा टेनिस खिलाड़ी सुमित नागल सुर्ख़ियों में छाए हुए हैं. सुमित नागल इस मुकाबले का पहला सेट 6-4 से जीतकर फेडरर को ही नहीं, टेनिस जगत को चौंकाया.

सुमित नागल की मां कृष्णा ने अपने बेटे के फेडरर के खिलाफ पहला सेट जीतने पर प्रतिक्रिया दी है. सुमित की मां ने कहा, हम उन्हें आज का मैच खेलते हुए देखकर बहुत खुश थे. सुमित राफेल नडाल को अपना आदर्श मानता है. मुझे उम्मीद है कि सुमित भविष्य में अच्छा करेगा और देश को गौरव प्रदान करेगा.

बता दें कि भारत के उदीयमान टेनिस खिलाड़ी सुमित नागल ने ग्रैंड स्लैम डेब्यू कर लिया है. साल के चौथे ग्रैंड स्लैम यूएस ओपन के पहले ही राउंड में सुमित का सामना टेनिस जगत के दिग्गज रोजर फेडरर से हुआ. मंगलवार को न्यूयॉर्क के आर्थर ऐश स्टेडियम में 22 साल के जोशिले क्वालिफायर सुमित नागल ने 38 साल के तजुर्बेकार फेडरर को जोरदार टक्कर दी.

21वां ग्रैंड स्लैम सिंगल्स टाइटल जीतने के लक्ष्य के साथ उतरे स्विस स्टार फेडरर ने पहले दौर का मुकाबला जीत लिया, लेकिन उतनी आसानी से नहीं, जितनी की उन्हें उम्मीद होगी. सुमित नागल ने इस मुकाबले का पहला सेट 6-4 से जीतकर फेडरर को ही नहीं, टेनिस जगत को चौंकाया. लेकिन इसके बाद फेडरर का अनुभव भारत के नौसिखिए पर भारी पड़ा. जो भी हो, सुमित नागल ने इस अनुभवी टेनिस स्टार का मुकाबला कर बहुत कुछ सीखा होगा. भारतीय फैंस को भी सुमित के डेब्यू का बेसब्री से इंतजार था. अंत में स्विस स्टार फेडरर ने नागल को 4-6, 6-1, 6-2, 6-4 से मात दी.

कौन हैं सुमित नागल

सुमित नागल हरियाणा के झज्जर जिले के जैतपुर गांव से हैं. परिवार में किसी की खेलों में जरा भी दिलचस्पी नहीं रही. उनके फौजी पिता सुरेश नागल को टेनिस में रुचि थी. सुमित को उनके पिता ने ही टेनिस खिलाड़ी बनाने के बारे में सोचा. सुरेश को एक रोज खयाल आया कि उनका बेटा भी तो दूसरे खिलाड़ियों की तरह खेलता नजर आ सकता है. हरियाणा के सुमित नागल ने आठ साल की उम्र में टेनिस खेलना शुरू किया था.

सुमित के परिवार को उनकी ट्रेनिंग के लिए दिल्ली शिफ्ट होना पड़ा. 2010 में अपोलो टायर वालों की टैलेंट सर्च प्रतियोगिता में सुमित चुन लिए गए. दो साल तक उन्होंने स्पॉन्सर किया. सुमित ने महेश भूपति की एकेडमी में भी ट्रेनिंग ली थी. पिछले नौ साल से वो कनाडा, स्पेन, जर्मनी में ट्रेनिंग कर चुके हैं.

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