रविवार को डब्लूडब्लूई बैटलग्राउंड का मुख्य आकर्षण दो भारतीय- जिंदर महाल और महान खली रहे. इस पंजाबी प्रिजन मैच में 'द ग्रेट खली' की मदद से महाल ने रैंडी ऑर्टन को मात दी. इसके साथ ही जिंदर महाल ने डब्ल्यूडबल्यूई चैंपियनशिप का टाइटल बरकरार रखा. हालांकि खली अब डब्ल्यूडबल्यूई का हिस्सा नहीं है, लेकिन बैटलग्राउंड में उनकी एंट्री ने धमाका कर दिया.
केज में खली का खौफ
मैंच में खली की एंट्री ऐसे वक्त हुई, जब रैंडी ऑर्टन ने बांस के बने केज से बाहर निकलना शुरू कर दिया था. 7 फुट 1 इंच के विशाल खली ने पूरे केज को अपने खुले हाथों से हिलाकर रख दिया, जिससे ऑर्टन नीचे आ गिरे. इसके बाद खली ने उनके हाथों को मरोड़ा. और उन्हें बाहर निकलने नहीं दिया. जिंदर महल और खली ने इस जीत के बाद किसी को भी अपने सामने कुछ नहीं समझा और स्मैकडाउन के सुपरस्टार एजे स्टाइल्स और जॉन सीना से खुद को बेहतर स्टार बता दिया.

ऐसे मिलती है जीत
दरअसल, पंजाबी प्रिजन मैच जीतने के लिए सुपरस्टार को दोनों केज से बाहर आना पड़ता है. इस केज में चार दरवाजे होते हैं और रेफरी भी. जब सुपरस्टार दरवाजा खोलने के लिए कहता है तो दरवाजे से बाहर निकलने के लिए सिर्फ एक मिनट होता है. इतने समय में बाहर नहीं आ पाने पर दरवाजा बंद कर दिया जाता है. इतने समय में सुपरस्टार को बाहर ही आना होता है, पिन फॉल या काउंट आउट इस मैच में कोई अहमियत नहीं रखता.
पंजाबी प्रिजन कब से
सबसे पहला पंजाबी प्रिजन मैच 2006 में ग्रेट अमेरिकन बैश में बिग शो और द अंडरटेकर के बीच बीच हुआ था. हालांकि जिंदर महल का कहना है कि ये मैच खली का बनाया हुआ है, लेकिन उस समय खली इसमें मौजूद नहीं थे. सबसे पहला पंजाबी प्रिजन मैच 2007 की नो मर्सी में खेला गया था, जिसमें खली का सामना बतिस्ता से हुआ था.