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क्या ब्रैडमैन से बेहतर हैं सचिन तेंदुलकर? जानें क्‍या सोचते हैं क्रिकेट के दिग्‍गज

इंडिया टुडे कॉन्क्लेव 'सलाम सचिन' में बोरिया मजूमदार ने क्रिकेट के पांच महान खिलाडि़यों से सवाल किए. सचिन के बारे इन सबकी एक राय उभरकर आई कि वे भारत के सबसे महान क्रिकेटर हैं. इस सेशन में ब्रायन लारा, मोहम्मद अजहरुद्दीन, शोएब अख्तर, गौतम गंभीर और रमीज राजा मौजूद थे. इस सेशन का नाम था 'क्या सचिन ब्रैडमैन से बेहतर हैं?'

इंडिया टुडे कॉन्क्लेव 'सलाम सचिन' में बोरिया मजूमदार ने क्रिकेट के पांच महान खिलाडि़यों से सवाल किए. सचिन के बारे इन सबकी एक राय उभरकर आई कि वे भारत के सबसे महान क्रिकेटर हैं. इस सेशन में ब्रायन लारा, मोहम्मद अजहरुद्दीन, शोएब अख्तर, गौतम गंभीर और रमीज राजा मौजूद थे. इस सेशन का नाम था 'क्या सचिन ब्रैडमैन से बेहतर हैं?'

आप सचिन को किस तरीके से देखते हैं?
गौतम गंभीर: 24 साल तक देश की अपेक्षाओं पर खरा उतरे हैं सचिन. मैं सोचता हूं कि सचिन महान हैं. कोई भी और ऐसा नहीं कर पाया और शायद न ही कर पाएगा.

शोएब अख्तर: ये आरोप गलत हैं कि मैंने सचिन को कभी स्लेज किया. कुछ लोग हैं जिनका मैं बहुत सम्मान करता हूं. ब्रायन लारा हैं, सचिन भी हैं. सचिन को बॉलिंग करना प्लेजर हैं. हम सिर्फ बॉल और बैट से लड़ते थे. मैं लारा के खिलाफ ज्यादा नहीं खेला, पर जिनके खिलाफ खेला हूं, उनमें सचिन सबसे मुश्किल बल्लेबाल हैं. मैंने कभी सचिन को बॉडीलाइन गेंदबाजी नहीं की. एक दो कोशिश की थी, पर सफल नहीं हुए. सचिन महान बल्लेबाज हैं, महान इंसान हैं.

रमीज राजा: सचिन पर बड़ी उम्मीद होती है. प्रेशर भी होता है. महानतम रोल मॉडल हैं वो. मुझे नहीं पता कि ऐसे टॉपिक पर क्या हूं. पर सही कहूं तो इन दिनों गेंदबाजी पर कई नियम लगा दिए गए हैं, जो पहले नहीं थे. बॉलर फ्री थे अपनी मर्जी से गेंद करने के लिए. सचिन ने खतरनाक गेंदबाजों को खेला है. खेल बदला है 24 सालों में. सचिन कभी किसी भी तरह के फॉर्मेट में आउट ऑफ टच नहीं दिखे. वे अपने खेल का लुत्फ देते हैं. ब्रैडमैन के समय 6 महान गेंदबाज थे. सचिन ने तो बहुत से महान गेंदबाजों को खेला. उनकी एवरेज 56 से ज्यादा है. बहुत बड़ी बात है.

ब्रायन आप सचिन को कैसे जज करते हैं?
ब्रायन:
ब्रैडमैन महान बल्लेबाज हैं. सचिन 24 साल खेले, रन बनाए, अद्भुत है. कोई भी ऐसा नहीं कर सका. विश्व क्रिकेट में सचिन का करियर सबसे बेहतरीन है.

आप सचिन के साथ खेले हैं, कैसा अनुभव रहा?
अजहर:
सचिन मेरी कप्तानी में 9 साल खेला है. उनका क्रिकेटिंग ब्रेन शानदार है. मैं रमन, अजय शर्मा उसे सुबह 2-3 बजे उठते देखते थे और वह उठकर अभ्यास करता था. जब भी हम मुश्किल होते थे, सचिन हमेशा सलाह देते थे. सचिन फिल्डिंग में दूर खड़े होते थे, ताकि वे पूरी गेम को एनालाइज कर पाएं. सचिन की सलाह पर जब हम कोई फैसला लेते थे, सफल रहता था. सचिन के साथ खेलना बहुत अच्छा रहा.

सचिन की वर्सेटैलिटी पर बात करें...
गंभीर:
सभी तरह के फॉर्मेट में खेलना हमेशा मुश्किल होता है. सचिन ने सभी गेम में बेहतर खेला है. टी-20 में भी सचिन ने बहुत अच्छा किया है. सचिन में रनों की भूख है, जो उन्हें सबसे अलग बनाती है.

शोएब: 1985 से 2000 तक का इरा में सबसे खतरनाक बॉलर थे. बल्लेबाज के लिए खेलना बहुत मुश्किल था. पेसर और स्पिनर दोनों अच्छे थे. सचिन ने साउथ अफ्रीका में भी खेला, जहां गेंदबाजों को हेंडल करना बहुत मुश्किल है और सचिन इस इरा में खेलते रहे हैं. सचिन ने हर जगह रन किए, न्यूजीलैंड में, ऑस्ट्रेलिया में, अपने घर में. दुनिया में कहीं भी रन कराना सचिन को सबसे अलग करता है.

अजहर: सचिन को बॉलिंग करना भी पसंद रहा है. हीरो कप की बात है. साउथ अफ्रीका के खिलाफ एक बार एक ओवर बाकी था, अफ्रीका को 6 रन चाहिए थे. हमने सोचा कि किसी अलग बॉलर को ओवर दिया जाए. सचिन को दिया तो सचिन ने हमें वह मैच जितवा दिया. अद्भुत था.

2011 विश्वकप फाइनल में ड्रेसिंग रूम में क्या चल रहा था? सचिन ने कहा था कि उन्होंने वह विनिंग शॉट नहीं देखा, जो धोनी ने लगाया था.
गंभीर:
हमने सचिन को जल्दी खो दिया था, लेकिन हम सोच रहे कि स्कोर बड़ा नहीं था, अच्छे खिलाड़ी थे, हम जीत सकते थे. मेरे करियर में भी यह सबसे बड़ी जीत रही. हां ड्रेसिंग रूम में शुरू में काफी टेंस माहौल था.

विश्वकप में भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ 5 मैच खेले, पांचों बार जीते, सचिन तीन बार मैन ऑफ द मैच रहे..
रमीज राजा:
ये आंकड़े मुझे बहुत दर्द देते हैं. सचिन ने इनमें अच्छा खेला. कोई शक नहीं, वह बेहतरीन है.

शोएब: विश्वकप में मैं अपफिट था. लेकिन सचिन जिस तरह से खेलने आए, हमें आइडिया नहीं था. मैं जैसे बॉल करना चाह रहा था, नहीं हो रही थी. मैंने सोचा कि ऑफ स्टंप पर करूं तो सचिन को परेशानी होगी, लेकिन सचिन ने उस पर भी छक्का लगाया. मैंने मिडल में फेंका तो भी छक्का लगाया. फिर मैंने सोचा कि क्या करूं. मैंने कहा कि मुझे छोड़ दो यार.

अजहर: सचिन का पहला शतक बेहतरीन था. न्यूजीलैंड में जब वह शतक नहीं कर पाया तो उसे मलाल था. क्योंकि यदि वह कर लेता तो दुनिया का सबसे युवा बल्लेबाज होता. वह हमेशा जीतना चाहता है, नंबर वन रहना चाहता है. वह बॉलिंग, फिल्डिंग और बैटिंग सबमें अव्वल रहना चाहता है.

टेस्ट में 4 नंबर पर और फिर वनडे में ओपनिंग करना कितना मुश्किल है?
रमीज:
मुश्किल भी है, आसान भी. बल्लेबाज की सोचा पर डिपेंड करता है. वनडे में सचिन को 50 ओवर खेलने को मिलते थे. दुनिया का सबसे अच्छा बल्लेबाज ज्यादा ओवर खेले तो टीम के लिए बेहतर होता है. क्रीज पर रिलेक्स रहते और एंजॉय करते करते रन बनाते जाते.

गंभीर: सचिन के साथ जब मैं क्रीज पर होता था तो वे छोटे-छोटे टिप्स देते रहते थे. जब आप क्रीज होते हैं तो ज्यादा डिसक्स नहीं करते, लेकिन सचिन जरूरी बातें बताते रहते. वे हमेशा गेम के लिए एप्रोच बताते थे कि कैसे खेलना सही रहेगा. सचिन क्रीज पर दूसरे बल्लेबाज के लिए बहुत मददगार होते थे.

लारा: 400 वनडे, 200 टेस्ट खेलना और 100 शतक बना लेना बड़ी बात है. यह स्पेशल अचीवमेंट है. मुझे गर्व है कि जब सचिन खेले उसी इरा में मैं भी खेला.

100 शतक करना कैसा लगेगा?
रमीज:
खेल के प्रति प्यार ही ऐसा करा सकता है. सचिन जैसे खिलाड़ी को सलाम करना चाहिए. वह बदलते माहौल, बदलते खेल में टिका रहा और लगातार रन करता रहा. 100 शतक किए. मेरे कंमेंट्री करियर में 2003 में सबसे बेहतरीन पल था, जब मुरलीधरन कर रहा था. लारा सामने थे और लगातार रन कर रहे थे. दो लीजेंड को देखकर अच्छा लग रहा था. लीजेंड्स की लड़ाई अच्छी लगती है.

1999 विश्वकप में सचिन को बोल्ड करने के बाद कैसा लगा?
शोएब:
मुझे भरोसा नहीं हो रहा था कि मैंने किसे आउट किया है. सचिन अपने शरीर को मूव करते हैं. मैं सचिन के पैड और बैट पर ध्यान रखे हुए था. मैं उन्हें बीट करना चाहता था. जैसे ही मैंने उसे आउट किया, मुझे लगा कि पूरा भारत मुझे दुश्मन मान रहा है. दुनिया की हर टीम गेंद पर काम (वर्क ऑन बॉल) करती है. बॉल को भारी करने की कोशिश करती है, (मजाक में) लेकिन पाकिस्तान का कोई जवाब नहीं.

कराची में मेरी बॉल सचिन के हेल्मेट पर लगी. सचिन ने बाद में दिखाया कि आपने मेरे हेल्मेट पर यहां गेंद मारी है. आप यह तो कर सकते हैं, लेकिन मुझे गिरा नहीं सकते. सचिन तेंदुलकर वाकई महान हैं.

सवाल-जवाब

श्वेता सिंह: शोएब आप जिसकी इज्जत करते हैं और जब उसके सामने बॉल करते हैं तो कैसा लगता है?
शोएब:
इसके सिवा कोई चारा नहीं. हम हमेशा उनकी इज्जत करते हैं. मैंने सचिन को कभी एब्यूज नहीं किया. हां गंभीर से कई बार हो जाता था. सचिन कभी कुछ नहीं बोलते. वह बॉल पर, गेम पर फोकस करते हैं. सचिन से ज्यादा नाइस आदमी, हंबल आदमी, इससे बेहतर ब्रांड अंबेसडर क्रिकेट में कभी नहीं मिला.

अभिनेता रजा मुराद ने एक शेर सुनाया-
पंरिदों को मंजिल मिलेगी यकीकन, ये फैले हुए उनके पर बोलते हैं
वही लोग खामोश रहते हैं अक्सर, जिनके काम बोलते हैं

रजा मुराद: क्या वजह है कि पाकिस्तान में सचिन जैसा कोई पैदा नहीं हो पाया?
शोएब:
आप हमें बल्लेबाज भेज दो हम आपको बॉलर भेज देते हैं. सचिन जैसा तो दुनिया में कोई नहीं है, तो पाकिस्तान में कैसे आ सकता है. अल्लाह ने आपको एक तोहफा दिया है. जितना इंडिया के‍ लिए सचिन ने किया, मैं उनकी बहुत इज्जत करता हूं, पूरा पाकिस्तान करता है.

सचिन की विकेट लेना बहुत मुश्किल होता था. बस ये था कि सचिन का विकेट सचिन की मर्जी से ही मिल सकता था.

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