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हॉकी दिग्गज मोहम्मद शाहिद की ड्रिब्लिंग स्किल का लोहा पाकिस्तान ने भी माना

मोहम्मद शाहिद से मैं कहता था कि तुम हमारी टीम में आ जाओ तो पाकिस्तान को दुनिया की कोई टीम नहीं हरा सकती और यही बात वो मेरे लिए कहा करता था. ये कहना है पाकिस्तान के महान सेंटर फॉरवर्ड हसन सरदार का जिनकी मैदान पर मोहम्मद शाहिद से कड़ी प्रतिद्वंद्विता थी और मैदान के बाहर घनिष्ठ मित्रता.

मोहम्मद शाहिद मोहम्मद शाहिद

मोहम्मद शाहिद से मैं कहता था कि तुम हमारी टीम में आ जाओ तो पाकिस्तान को दुनिया की कोई टीम नहीं हरा सकती और यही बात वो मेरे लिए कहा करता था. ये कहना है पाकिस्तान के महान सेंटर फॉरवर्ड हसन सरदार का जिनकी मैदान पर मोहम्मद शाहिद से कड़ी प्रतिद्वंद्विता थी और मैदान के बाहर घनिष्ठ मित्रता.

भारत के दिग्गज हॉकी खिलाड़ियों में शुमार मोहम्मद शाहिद की लंबी बीमारी के बाद बुधवार को निधन हो गया. 1984 लॉस एंजलिस ओलंपिक में गोल्ड मेडल विजेता पाकिस्तानी टीम के सदस्य सरदार ने 1982 में नई दिल्ली एशियाई खेलों के फाइनल में भारत के खिलाफ हैट्रिक लगाकर पाकिस्तान की 7-1 से जीत में सूत्रधार की भूमिका निभाई थी.

सरदार ने कहा, ‘मैं हमेशा शाहिद से कहता था कि तुम पाकिस्तानी टीम में आ जाओ तो दुनिया की कोई टीम हमें नहीं हरा सकती. वह मुझसे कहता था कि तुम भारत की टीम में आ जाओ तो हम पूरी दुनिया को हरा देंगे. उसके जैसे खिलाड़ी बिरले ही होते हैं जिनके पास ड्रिबलिंग कौशल भी हो और रफ्तार भी. उन्होंने बताया कि मैदान के बाहर वह जितने करीबी दोस्त थे, मैदान पर उतने ही कट्टर दुश्मन.’

उन्होंने कहा, ‘चूंकि हम अपने अपने देश के लिए खेलते थे तो मैदान के भीतर मकसद एक दूसरे को हराने का ही होता था लेकिन मैदान से बाहर आने के बाद हम दोस्त थे. शाहिद जितना आला दर्जे का खिलाड़ी था, उतना ही उम्दा इंसान भी था. हमने बहुत अच्छे दिन साथ गुजारे. दिल्ली एशियाड में पाकिस्तान के कप्तान रहे समीउल्लाह ने बताया कि उन्होंने फाइनल में मोहम्मद शाहिद और जफर इकबाल की जोड़ी को रोकने के लिए खास रणनीति बनाई थी.’

समीउल्लाह ने कहा, ‘मैं 1982 एशियाड में पाकिस्तान का कप्तान था और हमें पता था कि भारत को उसके दर्शकों के सामने हराना कितना कठिन होगा खासकर जफर और शाहिद शानदार फार्म में थे. हमने उन दोनों को रोकने के लिए खास रणनीति बनाई थी और कामयाब रहे. पाकिस्तान वह मैच 7-1 से जीता था.’

उन्होंने कहा, ‘भले ही हम वह फाइनल जीत गए हो लेकिन जफर और शाहिद की जोड़ी के फन का लोहा पूरी दुनिया ने माना था. उनका खेल देखने में बेहद मजा आता था. शाहिद कराची में 1982 में एशिया कप खेलने आया था और हमारी काफी दोस्ती हो गई थी. फिर वह 2004 में मुझे मिला तो मैंने उसे सेहत का ध्यान रखने की सलाह भी दी थी. वह ऐसे चुनिंदा खिलाड़ियों में से था जिनके दम पर भारत और पाकिस्तान ने वर्ल्ड हॉकी पर राज किया था.’

सरदार ने एक और रोचक वाक्ये का जिक्र करते हुए बताया कि दिल्ली एशियाड के बाद दोनों टीमें एसांडा कप खेलने मेलबर्न चली गई जहां उस हार से दुखी शाहिद ने काफी समय उनसे बात नहीं की. उन्होंने कहा, ‘मुझे याद है कि उस हार के बाद शाहिद काफी दुखी थे और दोनों टीमें इसके तुरंत बाद ऑस्ट्रेलिया में एसांडा कप में मिली तो काफी समय उन्होंने बात भी नहीं की. वहां फाइनल में भारत ने हमें 2-1 से हरा दिया तो उन्होंने यही कहा कि ऐसा नतीजा एशियाड में मिलता तो अच्छा रहता.’

शाहिद पहली बार 1979 में फ्रांस में हुए जूनियर वर्ल्ड कप में भारत के लिए खेले थे. सीनियर टीम के लिए भी उन्होंने उसी साल कुआलालम्पुर में चार देशों के टूर्नामेंट के जरिये पदार्पण किया. आगा खान कप में प्रभावी प्रदर्शन के कारण उन्हें वासुदेवन भास्करन की अगुवाई वाली टीम में चुना गया. जफर इकबाल के साथ उसकी मैदानी साझेदारी दुनिया भर में मशहूर थी. उन्हें कराची में 1980 चैम्पियंस ट्राफी में सर्वश्रेष्ठ फारवर्ड खिलाड़ी चुना गया. उन्हें 1986 की एशियाई आल स्टार टीम में भी जगह मिली और 1985-86 में भारतीय टीम के वह कप्तान रहे. बाद में वह वाराणसी में भारतीय रेलवे के खेल अधिकारी भी रहे.

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