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धोनी ने क्रिकेट नहीं बाइक रेसिंग के लिए टिप्‍स दिए

महेंद्र सिंह धोनी का बाइक प्रेम जगजाहिर है लेकिन भारतीय क्रिकेट टीम का कप्तान सुपरबाइक के बारे में इतना गहरा ज्ञान रखता है कि उनकी माही रेसिंग टीम के वर्ल्‍ड चैंपियन राइडर कीनन सोफोगलु भी हैरान-परेशान हो गये.

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महेंद्र सिंह धोनी का बाइक प्रेम जगजाहिर है लेकिन भारतीय क्रिकेट टीम का कप्तान सुपरबाइक के बारे में इतना गहरा ज्ञान रखता है कि उनकी माही रेसिंग टीम के वर्ल्‍ड चैंपियन राइडर कीनन सोफोगलु भी हैरान-परेशान हो गये.

भारत में सुपरबाइक रेसिंग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ग्रेटर नोएडा स्थित बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट पर पहुंचे कीनन ने संवाददाताओं से कहा, ‘मुझे पता है कि धोनी के पास ढेर सारी बाइक हैं. वह बाइक के बारे बहुत गहरी जानकारी रखते हैं. इससे मैं खुद दंग रह गया. उन्हें इसका अच्छा तकनीकी ज्ञान भी है और मुझे बहुत खुशी है कि वह हमारी टीम के मालिक हैं.

मोटरबाइक के प्रति भी जुनूनी धोनी ने 2012 में माही रेसिंग टीम की शुरुआत की थी जो भारत की पहली सुपरबाइक रेसिंग टीम है. इस टीम ने 2013 में बेहतरीन शुरुआत की तथा तुर्की के उसके राइडर कीनन आस्ट्रेलिया के फिलिप आइलैंड में पहली रेस जीतने में सफल रहे जबकि टीम के दूसरे राइडर फ्रांस के फैबियन फोरेट चौथे स्थान पर रहे.

तीन बार के विश्व चैंपियन कीनन ने कहा, ‘पिछली बार जब मैं यहां आया तो धोनी से मेरी संक्षिप्त मुलाकात हुई थी, लेकिन इस बार मैंने उनसे लंबी बातचीत की. हमने अपने परिवार, बाइक, उनके टायरों, स्पीड आदि पर बात की. मेरे यहां लोग क्रिकेट के बारे में ज्यादा नहीं जानते लेकिन मैंने अब इस खेल का अनुसरण करना शुरू कर दिया है.

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उन्होंने कहा, ‘मुझे यहां आकर पता चला कि धोनी यहां कितना बड़ा स्टार है लेकिन उनका व्यवहार बहुत अच्छा है. मुझे व्यक्तिगत तौर पर ऐसे लोग पसंद हैं. वह अपने खेल का चैंपियन है और मुझे विश्वास है कि हमारी रेसिंग टीम भी चैंपियन बनेगी.’

कीनन ने हालांकि धोनी की टीम से जुड़ने से पहले काफी विचार विमर्श किया था क्योंकि तब मोटरबाइक के खतरनाक करियर को जारी रखने के लिये उनकी मां ने ही मना कर दिया था.

उन्होंने कहा, ‘मेरे छोटे भाई की 2002 में घर के आगे सड़क पार करते समय मौत हो गयी. मेरे बड़े भाई 2008 में मोटररेसिंग में जान गंवा बैठे. इसके बाद 2011 में मेरे पिताजी का 54 साल की उम्र में निधन हो गया. तीन भाईयों में मैं अकेला रह गया हूं. मेरी मां बहुत चिंतित थी.’

कीनन ने कहा, ‘मां ने मुझे रेसिंग छोड़ने के लिये कहा. मैंने उनसे कहा कि मैं बिजनेस नहीं कर सकता. मैं खिलाड़ी हूं और कोई और काम नहीं जानता. मैंने मां को समझाया कि छोटा भाई घर के आगे एक्सीडंेट में मारा गया तो फिर मौत तो कहीं भी आ सकती है. आखिर में मां मान गयी. अब मुझे अपनी मां के लिये भी विश्व चैंपियन बनना है.

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इस अवसर पर ग्रुप आफ दिल्ली सुपरबाइकर्स के 30 बाइकर्स ने सर्किट पर अपनी रेसिंग का कमाल भी दिखाया. उन्हें कीनन और फोरेट से बात करने का मौका भी मिला. ये दोनों रेसर अंतरराष्ट्रीय रेसिंग टीम का हिस्सा होने के कारण यहां अभ्‍यास नहीं कर सकते थे.

फोरेट ने कहा, ‘सुपरबाइक से जुड़े उत्साही युवाओं से मिलने के अलावा हमें बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट के बारे में जानने का भी मौका मिला. हमने इस सर्किट के बारे में काफी कुछ सुना था. यहां का अनुभव हमें आगे फायदा पहुंचाएगा. ‘ विश्व सुपरबाइक का 15वां चरण बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट पर ही होगा.

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