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मैं द्रविड़ की जगह नहीं ले सकता: पुजारा

चेतेश्वर पुजारा को भी तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करना पसंद है और गुरुवार को उन्होंने इस क्रम पर उतरकर शतक भी जमाया लेकिन इस युवा बल्लेबाज ने कहा कि यह कहना सही नहीं होगा कि वह महान राहुल द्रविड़ की जगह ले सकते हैं.

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चेतेश्वर पुजारा
चेतेश्वर पुजारा

चेतेश्वर पुजारा को भी तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करना पसंद है और गुरुवार को उन्होंने इस क्रम पर उतरकर शतक भी जमाया लेकिन इस युवा बल्लेबाज ने कहा कि यह कहना सही नहीं होगा कि वह महान राहुल द्रविड़ की जगह ले सकते हैं.

द्रविड़ ने इस साल के शुरू में संन्यास लेने से पहले तक नंबर तीन पर कई यादगार पारियां खेली. पुजारा ने न्यूजीलैंड के खिलाफ पहले टेस्ट क्रिकेट मैच के शुरुआती दिन नाबाद 119 रन बनाने के बाद पत्रकारों से कहा, ‘मैं नहीं मानता कि मैं राहुल द्रविड़ की जगह ले सकता हूं क्योंकि वह महान खिलाड़ी हैं. उन्होंने दोनों प्रारूप में 10,000 से अधिक रन बनाये हैं. उनकी जगह लेना बहुत मुश्किल है.’

अपना चौथा टेस्ट मैच खेल रहे पुजारा ने कहा कि उन्हें इस पोजीशन पर खेलने का काफी अनुभव है और इसलिए रन बनाना मुश्किल नहीं था. उन्होंने कहा, ‘मैं जानता हूं कि मैं नंबर तीन पर बल्लेबाजी कर सकता हूं. इसलिए मेरी तैयारियां बहुत अच्छी थी. मैं सौराष्ट्र के लिये नंबर तीन पर खेलता हूं. कुछ अवसरों पर मैंने अपने नियोक्ता इंडियन आयल कारपोरेशन के लिये पारी की शुरुआत भी की. इसलिए मुझे शीर्ष क्रम में खेलने का पर्याप्त अनुभव है. मैं किसी चीज को लेकर चिंतित नहीं था. घरेलू स्तर पर मैं तीसरे और चौथे नंबर पर बल्लेबाजी करता रहा हूं.’

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पुजारा ने कहा कि वह पहला टेस्ट शतक जमाकर खुश हैं. वह 2010 में आस्ट्रेलिया के खिलाफ बैंगलोर में अपने पदार्पण मैच में 72 रन पर आउट हो गये थे. उन्होंने कहा, ‘निश्चित तौर पर मैं खुश हूं. यह स्वप्निल शुरुआत है.मैं अपने पदार्पण मैच में शतक जड़ना चाहता था लेकिन इससे चूक गया था. इसलिए मैं वास्तव में संतुष्ट हूं कि मैं अपना पहला शतक जमाने में सफल रहा.’

पुजारा ने शतक को अपने माता-पिता को समर्पित किया और अब वह इसे शुक्रवार को दोहरे शतक में तब्दील करने पर ध्यान दे रहे हैं. उन्होंने कहा, ‘मैं हमेशा उनका आभारी रहूंगा. मैं इसे अपने पिता को समर्पित करता हूं. मैं जब बच्चा था वह तभी से मेरे साथ काम कर रहे हैं. मैं इसे अपने पिता और मां को समर्पित करना चाहूंगा.’

पुजारा ने कहा, ‘मैं समझता हूं कि पहला लक्ष्य 400 रन के स्कोर तक पहुंचना होगा. यदि मैं दोहरा शतक लगा लेता हूं तो यह शानदार होगा लेकिन हमारा शुरुआती लक्ष्य 400 तक पहुंचना है.’ पुजारा ने कहा कि हाल में उन्हें कई परेशानियों से गुजरना पड़ा लेकिन इससे वह मानसिक रूप से मजबूत हुए. उन्होंने कहा, ‘मैं दो बार चोटिल हुआ. मैं एक साल तक खेल से बाहर रहा. यह मेरे और मेरे परिवार के लिये बुरा समय था. मैं जानता था कि जिस खेल को मैं सबसे अधिक चाहता हूं मैं उसमें वापसी करने में सफल रहूंगा.’

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उन्होंने कहा, ‘यहां तक कि मेरे पिता को भी मुश्किल दौर से गुजरना पड़ा. उनकी बाइपास सर्जरी हुई है और वह अब भी मुझे कोचिंग दे रहे हैं. इसलिए जब आप मुश्किल दौर से गुजरते हैं तो आप मानसिक रूप से मजबूत बन जाते हो. खेल के लिये भूख और बढ़ गयी है.’

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