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सचिन तेंदुलकर बोले- 'वो 22 गज मेरे लिए मंदिर की तरह हैं'

इंटरनेशनल क्रिकेट को अलविदा कहकर पूरे देश को भावुक करने के बाद भारत रत्न सचिन तेंदुलकर ने रविवार को पहली बार मीडिया से बात की. उन्होंने कहा, 'वो 22 गज की पिच मेरे लिए मेरे लिए मंदिर के समान है, उसने मुझे सब कुछ दिया.'

सचिन तेंदुलकर सचिन तेंदुलकर

इंटरनेशनल क्रिकेट को अलविदा कहकर पूरे देश को भावुक करने के बाद भारत रत्न सचिन तेंदुलकर ने रविवार को पहली बार मीडिया से बात की. उन्होंने कहा, 'वो 22 गज की पिच मेरे लिए मेरे लिए मंदिर के समान है, उसने मुझे सब कुछ दिया.'

अपने 24 साल के करियर को सपनों का सफर बताते हुए सचिन ने कहा, 'अभी भी मुझे यकीन नहीं हो रहा कि बस अब क्रिकेट और नहीं खेल पाऊंगा. क्रिकेट मेरी जिंदगी रहा है. ये मेरे लिए ऑक्सीजन है. अब भी मैं टीवी पर विदाई का विजुअल देखकर भावुक हो जाता हूं.'

किसी भी भारतीय खिलाड़ी को अब तक कि सबसे यादगार विदाई मिलने के बाद सचिन ने कहा कि आज (रविवार) की सुबह काफी राहत भरी थी. मैं आज सुबह साढ़े 6 बजे उठा तो मुझे लगा कि जल्दी तैयार होकर मैच के लिये भागना नहीं है. किसी तरह की जल्दी नहीं थी. आज खुद चाय बनाई और पत्नी के साथ शानदार नाश्ता किया. साथ ही एसएमएस से लोगों की शुभकामनाओं के जवाब दिए.'

संन्यास का फैसला
वेस्टइंडीज के खिलाफ शनिवार को अपना 200वां और आखिरी टेस्ट खेलकर 24 बरस के इंटरनेशनल करियर को विराम देने वाले सचिन तेंदुलकर ने संन्यास के अपने फैसले पर कहा, ‘मेरे संन्यास को लेकर सालों से सवाल उठ रहे थे और मैं हमेशा कहता आया था कि जिस दिन यह अहसास होगा कि मुझे खेलना रोक देना चाहिये, मैं खुद ऐलान करूंगा. मुझे लग रहा था कि मेरा शरीर अब खेलने के लिए फिट नहीं रहा है तो मैंने फैसला ले लिया. अभ्यास में प्रयास करना पड़ रहा था और यह अहसास होते ही मैने फैसला ले लिया, जिसका मुझे कोई खेद नहीं है.’

उन्होंने कहा, ‘24 साल तक देश के लिये खेलते हुए मैंने अलग-अलग चुनौतियों का सामना किया लेकिन परिवार, कोचों, दोस्तों और साथी खिलाड़ियों की मदद से यह सफर स्वर्णिम रहा. मुझे कल (शनिवार) रात तक यकीन नहीं हो रहा था कि अब कहीं नहीं खेलूंगा. लेकिन मुझे कोई खेद नहीं है. यह सही वक्त था और मैने अपने 24 साल के सफर का पूरा मजा लिया.’ तेंदुलकर ने यह भी कहा कि वह भविष्य में क्रिकेट से जुड़े रहेंगे. संन्यास लेते वक्त मैं इतना इमोश्नल नहीं हुआ था. परिवार उस दौरान जरूर भावुक हो गया था.

आगे क्या करेंगे सचिन
भविष्य की प्लानिंग से जुड़े सवालों पर मास्टर ब्लास्टर ने कहा कि क्रिकेट अकेडमी खोलने का आइडिया अच्छा है. वैसे अभी मैं आराम करना चाहता हूं.' व्यंग्य भरे लहजे में उन्होंने कहा कि 24 साल खेला हूं तो कम से कम 24 दिन तो आराम करूंगा ही.' उन्होंने कहा, 'मैं युवा खिलाड़ियों की मदद करता रहूंगा. देश के लिए काम करता रहूंगा.'

'अर्जुन को अपने हाल पर छोड़ दें'
सचिन ने मीडिया से अपने बेटे अर्जुन पर दबाव नहीं बनाने का आग्रह किया. अर्जुन तेंदुलकर अपने पिता के नक्शे-कदम पर चल रहे हैं और मुंबई की अंडर-14 टीम के सदस्य रह चुके हैं. उनके प्रदर्शन पर हालांकि मीडिया की निगाह लगी रहती है जिससे सचिन खुश नहीं नजर आए. सचिन ने कहा, ‘पिता होने के नाते मैं आपसे आग्रह करूंगा कि उसे अपने हाल पर छोड़ देना चाहिए. उसे क्रिकेट का मजा लेने दीजिए. उससे अपेक्षाएं मत रखो कि उसके पिता ने ऐसी क्रिकेट खेली तो उसे भी वैसा ही खेलना होगा.’ उन्होंने कहा, ‘मैंने कभी इस तरह की अपेक्षाएं नहीं झेली हैं. मेरे पिताजी प्रोफेसर थे और मेरे समय में मेरे पिताजी से यह सवाल नहीं किया गया कि आपके बेटे ने कलम के बजाय क्रिकेट का बल्ला क्यों थाम लिया.’ तेंदुलकर ने कहा कि अर्जुन भी क्रिकेट से भरपूर प्यार करता है और उसे भी इस खेल का पूरा लुत्फ उठाने का अधिकार है. उन्होंने कहा, ‘क्रिकेट में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने के लिये प्यार जरूरी है और वह इस खेल से प्यार करता है. मैं उस पर प्रदर्शन का दबाव नहीं डालना चाहूंगा. आप भी दबाव मत डालो. उसे खुला छोड़ दो और खेल का मजा लेने दो. आगे क्या होता यह भगवान तय करेंगे, हम नहीं.’

'विकेट से बात करते वक्त हो गया था भावुक'
सचिन ने यह भी कहा कि विदाई के दौरान मैदान पर अपने जज्बात काबू में रखने की उन्होंने पूरी कोशिश की लेकिन विकेट से बात करते समय वह आंसू नहीं रोक सके. उन्होंने कहा, ‘उस समय मुझे लगा कि मैं अब कभी भारत के लिये नहीं खेलूंगा तो मैं काफी भावुक हो गया. मुझे लगा कि मैं आखिरी बार स्टेडियम में खेल रहा हूं. जब ड्रेंसिंग रूम में लौट रहा था तो मेरी आंख में आंसू थे. उस अहसास को जाहिर कर पाना मुश्किल है लेकिन इस सबके बावजूद मुझे लगता है कि मेरा फैसला सही था.’ उन्होंने यह भी कहा कि उनका दिल हमेशा भारत की जीत के लिये दुआ करता रहेगा.

'भारत रत्न देश की सभी माताओं को समर्पित'
सचिन ने भारत रत्न को देश की सभी माताओं को समर्पित किया. सचिन ने कहा कि माताओं को अपने बच्चों को पालने और काबिल बनाने में कितनी मेहनत करनी पड़ती है, उसका उन्हें पूरा अहसास है. इसलिए वह इस सम्मान को सभी माताओं को समर्पित कर रहे हैं. सचिन ने कहा, 'भारत रत्न मेरी मां के लिए है. एक पुत्र होने के नाते मैं समझ सकता हूं कि मुझे पालने में मेरी मां को कितनी तकलीफ हुई. मेरे माता-पिता ने मुझे बड़ा करने और काबिल बनाने के लिए कितना बलिदान किया है. सिर्फ मेरी मां ने ही नहीं बल्कि दुनिया और देश की करोड़ों मांएं अपने बच्चों को बड़ा करने और काबिल बनाने के लिए अनगिनत बलिदान करती हैं. मैं उन सभी माताओं को यह सम्मान समर्पित करता हूं.'

'मेरी मां का मुझे खेलते देखना बेहद स्पेशल था'
सचिन ने कहा, ‘मेरी मां ने कभी मुझे मैदान में खेलते नहीं देखा था. मैंने बीसीसीआई से अनुरोध किया कि मेरा आखिरी टेस्ट मुंबई में आयोजित करे. यह मेरी मां के लिये सरप्राइज था.’ उन्होंने कहा, ‘मेरी मां बहुत खुश थी. पहले मुझे लगा कि स्वास्थ्य कारणों से वह आएगी भी या नहीं. मैने मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन से एक कमरा भी रखने के लिये कहा था लेकिन मेरी मां ने पूरा मैच देखा. यह मेरे लिये खास पल था.’ 

'मुझ पर परिवार की अपेक्षाओं का बोझ नहीं था'
सचिन ने कहा, ‘मेरे परिवार ने मेरी हमेशा हौसलाअफजाई की है. चाहे मैं शतक बनाऊं या 15-20 रन. मैं अच्छा प्रदर्शन इसलिये कर सका क्योंकि परिवार से अपेक्षाओं का बोझ नहीं था. हर भारतीय परिवार की तरह हम भगवान को मिठाई चढ़ाकर खुशी मनाते हैं और मेरी मां ने कल (शनिवार को) भी यही किया.’ अपने भाई और प्रेरक अजीत तेंदुलकर के बारे में उन्होंने कहा, ‘हम दोनों का यह साझा सपना था. मैं शब्दों में नहीं बता सकता कि अजीत ने मेरे लिये क्या किया है. कल वह भावुक था लेकिन मुझे दिखा नहीं रहा था.' 

'चोटों के दौरान लगा कि बस अब नहीं खेल पाऊंगा'
करियर में कई चोटों का सामना करने वाले लिटिल मास्टर ने कहा कि एक बार तो उन्हें लगा था कि वह दोबारा बल्ला भी नहीं पकड़ सकेंगे. उन्होंने कहा, ‘ये चुनौतियां काफी मुश्किल थी और करियर खत्म होने का डर था. टेनिस एल्बो के बाद तो मैं अपने बेटे अर्जुन का प्लास्टिक का बैट भी नहीं उठा पा रहा था. मैदान पर उतरा तो 10-12 साल के बच्चे मेरे शाट्स रोक रहे थे जिससे मुझे लगा कि अब दोबारा नहीं खेल पाऊंगा. उस समय कई लोगों की मदद से मैं वापसी कर सका. उन सभी को धन्यवाद.’

म्यूजिक के शौकीन मास्टर ब्लास्टर
संगीत के शौकीन सचिन तेंदुलकर से उनके पसंदीदा फनकारों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि किसी एक का नाम लेना कठिन होगा. उन्होंने कहा, ‘संगीत मेरा शौक और साथी है. मैं खूब गाने सुनता हूं. अच्छे मूड में होता हूं तो अलग और खराब मूड में अलग. सभी कलाकारों की कद्र करता हूं क्योंकि मुझे लगता है कि उस मुकाम तक पहुंचना आसान नहीं होता. कुछ तो बरसों से लगातार बेहतरीन गा रहे हैं.’ 

सचिन ने कहा कि वेस्टइंडीज कमजोर टीम नहीं है. क्रिकेट में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं.


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