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लिएंडर पेस के पास ओलंपिक पदक जीतने का आखिरी मौका

डेविस कप में दोनों शानदार प्रदर्शन किया और साउथ कोरिया के खिलाफ जबरदस्त जीत दर्ज की. पेस का ये शायद आखिरी ओलंपिक होगा. इसलिए वो एक बार फिर से ओलंपिक पोडियम पर जरूर चढ़ना चाहेंगे

लिएंडर पेस और महेश भूपति लिएंडर पेस और महेश भूपति

लिएंडर पेस भारत के बेहतरीन टेनिस खिलाड़ियों में से एक  हैं. रियो ओलंपिक में पेस को अपने दूसरे पदक की तलाश है. भारत के इस महान खिलाड़ी का ये सातवां ओलंपिक होगा. 1996 में अटलांटा ओलंपिक में पेस ने सिंगल्स में कांस्य पदक जीता था. उस समय उनकी उम्र सिर्फ 23 साल थी.

बोपन्ना के साथ जोड़ी बनाकर खेलेंगे पेस
करियर में 107 पार्टनरों के साथ खेल चुके लिएंडर पेस इस बार ओलंपिक में रोहन बोपन्ना के साथ मैदान पर उतर रहे हैं. बोपन्ना ने पेस के साथ रियो ओलंपिक में खेलने से मना कर दिया था. बावजूद इसके दोनों खिलाड़ियों ने डेविस कप में शानदार प्रदर्शन किया और साउथ कोरिया के खिलाफ जबरदस्त जीत दर्ज की. पेस का ये शायद आखिरी ओलंपिक होगा. इसलिए वो एक बार फिर से ओलंपिक पोडियम पर जरूर चढ़ना चाहेंगे.

बोपन्ना 14 डबल्स खिताब जीत चुके हैं
मौजूदा समय में देश के टॉप खिलाड़ियों में शुमार रोहन बोप्पना का यह लगाता दूसरा ओलंपिक है. बोपन्ना 2012 लंदन ओलंपिक में महेश भूपति के साथ जोड़ी बनाकर खेले थे. लेकिन दूसरे दौर में ही इस भारतीय जोड़ी को शिकस्त झेलनी पड़ी थी. बोपन्ना ने इस साल फ्रेंच ओपन में शानदार प्रदर्शन कर अपने दम पर रियो का टिकट हासिल किया है. पिछले दो साल में वो कोई खास प्रदर्शन नहीं कर सके. उन्होंने मैड्रिड मास्टर्स जीता और वर्ल्ड टूर फाइनल्स में रनरअप रहे.

टेनिस में कितना दूर है पदक
रियो ओलंपिक में बोपन्ना और पेस की राह आसान नहीं होने वाली है. भारतीय जोड़ी का मुकाबला दुनिया की टॉप जोड़ियों से होगा. पदक के पास पहुंचने के लिए पेस और बोपन्ना को कम से कम तीन राउंड में जीत दर्ज करनी ही होगी. और बेहतरीन तालमेल बिठाना होगा. तभी पदक जीतने का सच हो पाएगा .

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