चाय बागान से काम करके लौटने के बाद वह 13 किलोमीटर दूर जलपाईगुड़ी टाउन के
रायकोट पाड़ा स्पोर्टिंग एसोसिएशन ग्राउंड तक अपनी बेटी को साइकिल पर बैठा
कर ले जाती थीं. स्वप्ना के पहले कोच सुकांत सिन्हा ने इंडिया टुडे-आजतक से कहा, 'उनकी मां नहीं होती, तो स्वप्ना आज जहां पहुंची हैं, नहीं पहुंच पातीं. वह गरीब थीं लेकिन उन्होंने गरीबी को अपनी बेटी की राह का रोड़ा नहीं बनने दिया.'