पेरिस ओलंपिक 2024 से पहले भारत को बड़ा झटका लगा है. लॉन्ग जम्पर (लंबी कूद के खिलाड़ी) मुरली श्रीशंकर घुटने की चोट के चलते पेरिस ओलंपिक से बाहर हो गए हैं. श्रीशंकर पेरिस में मेडल का दावेदार माने जा रहे थे, ऐसे में उनका बाहर होना भारतीय फैन्स के लिए काफी दुखद खबर है. श्रीशंकर ने ट्वीट करके फैन्स को इस खबर से अवगत कराया. इस साल पेरिस ओलंपिक 17 दिन चलेंगे. यह गेम्स 26 जुलाई से 11 अगस्त तक होने हैं.
एशियाई खेलों के रजत पदक विजेता श्रीशंकर ने 2023 एशियाई एथलेटिक्स चैम्पियनशिप में 8.37 मीटर के प्रयास से रजत पदक जीतते हुए पेरिस ओलंपिक के लिए क्वालीफाई किया था. इस 25 वर्षीय खिलाड़ी को शंघाई/सुझोउ और दोहा में क्रमश: 27 अप्रैल और 10 मई को लगातार दो डाइमंड लीग प्रतियोगिता के साथ अपने सत्र की शुरुआत करनी थी, लेकिन मंगलवार को ट्रेनिंग के दौरान उन्हें चोट लगी और उनका ओलंपिक में हिस्सा लेने का सपना टूट गया.
— Sreeshankar Murali (@SreeshankarM) April 18, 2024
श्रीशंकर ने X पर लिखा, 'दुर्भाग्य से, यह बुरे सपने की तरह लगता है... लेकिन यह हकीकत है. मेरा पेरिस ओलंपिक का सपना टूट गया है. मंगलवार को ट्रेनिंग के दौरान मेरे घुटने में चोट लग गई. परीक्षण और परामर्श के बाद यह निर्णय लिया गया कि मुझे सर्जरी की आवश्यकता होगी. इसके चलते मैं उस चीज से दूर हो गया, जिसका मैं इतने वर्षों से लगातार पीछा कर रहा था. हर दिन जागना और खुद को फिट महसूस करना हर एथलीट का सपना होता है. इस घटना से पहले तक मैं इसे जी रहा था.'
श्रीशंकर कहते हैं, 'जिंदगी अजीब स्क्रिप्ट लिखती है और कभी-कभी इसे स्वीकार करने और आगे बढ़ने में साहस होता है. मैं यही करूंगा. मेरी वापसी की यात्रा उस क्षण शुरू हुई, जब मेरे घुटने में चोट लगी. यह रास्ता लंबा तथा कठिन होने वाला है और मुझसे बहुत कुछ छीन लेगा.'
बास्केटबॉल के दिग्गज कोबे ब्रायंट को अपना आदर्श मानने वाले श्रीशंकर ने कहा, ‘अच्छी बात यह है कि मेरे पास देने के लिए बहुत कुछ है. मैं इससे निपट लूंगा क्योंकि मांबा मानसिकता का यही मतलब है.' शब्द 'माम्बा मानसिकता' कोबे ब्रायंट की जीवन और प्रतिस्पर्धा के प्रति मानसिकता और सकारात्मक दृष्टिकोण को दर्शाता है.
श्रीशंकर ने बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में जीता था गोल्ड
केरल के रहने वाले मुरली श्रीशंकर ने साल 2022 में बर्मिंघम में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स के दौरान लॉन्ग जम्प इवेंट में सिल्वर मेडल जीता था. इसके साथ ही श्रीशंकर कॉमनवेल्थ के लॉन्ग जम्प में मेडल जीतने वाले दूसरे भारतीय पुरुष एथलीट बन गए थे. इससे पहले भारत को कॉमनवेल्थ के लॉन्ग जम्प में सबसे पहला मेडल 1978 में मिला था. तब सुरेश बाबू ने शानदार प्रदर्शन करते हुए ब्रॉन्ज मेडल जीता था.
पिछले साल जून में श्रीशंकर तीसरे स्थान पर रहकर डाइमंड लीग प्रतियोगिता में शीर्ष तीन में जगह बनाने वाले तीसरे भारतीय बने थे. हालांकि वह बुडापेस्ट में विश्व चैम्पियनशिप के क्वालीफाइंग दौर से बाहर होने से निराश थे, लेकिन हांगझोउ में एशियाई खेलों में रजत पदक जीतकर जोरदार वापसी की.