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Mind Rocks 2019: चहल ने खोले ड्रेसिंग रूम के राज, इस खिलाड़ी को बताया साइलेंट किलर

चहल ने ड्रेसिंग रूम के बारे में बताया कि ड्रेसिंग रूम में विराट भाई साइलेंट किलर हैं. वो चुपचाप बीच में आकर मस्ती कर देते हैं और कोई जवाब भी नहीं दे पाता.

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Yuzvendra Chahal
Yuzvendra Chahal

  • इंडिया टुडे माइंडरॉक्स-2019 में युजवेंद्र चहल ने की शिरकत
  • युजवेंद्र चहल ने बताया शतरंज से क्रिकेट पिच तक का सफर

इंडिया टुडे माइंडरॉक्स-2019 में भारतीय क्रिकेट टीम के लेग स्पिनर युजवेंद्र चहल ने शिरकत की. शनिवार को स्पोर्ट्स सेशन 'Expending Horizons: From World Class Chess to World Cup Cricket' के दौरान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्रिकेट में धमाल मचाने वाले 29 वर्षीय लेग स्पिनर युजवेंद्र चहल ने अपने अनुभव साझा किए. पूरे सेशन को सीनियर एग्जीक्यूटिव एडिटर स्पोर्ट्स विक्रांत गुप्ता ने संचालित किया.

युजवेंद्र चहल एक ऐसा नाम जो वर्ल्ड क्रिकेट में रातों रात मशहूर हो गया. जींद (हरियाणा) के इस लेग स्पिनर के पास शतरंज का दिमाग है, जिसे वह चेसबोर्ड पर आजमाया करते थे और अब क्रिकेट पिच पर उसका बखूबी इस्तेमाल कर रहे हैं. चहल क्रिकेट में डेब्यू से पहले शतरंज में भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की ओर से खेल चुके हैं.

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विक्रांत गुप्ता ने चहल से पूछा, 'आपने दो वर्ल्ड कप खेले हैं. शतरंज और क्रिकेट दोनों. कौन-सा आपके दिल के ज्यादा करीब है. इस पर चहल ने कहा कि चेस दिल के ज्यादा करीब है.' चहल ने कहा, 'जब मैं बॉलिंग करता हूं तो बैट्समैन को देखता हूं कि वो क्या कर रहा है. चहल ने कहा, मैं सोचता हूं कि बैट्समैन को कैसे आउट किया जा सकता है.'

चहल ने ड्रेसिंग रूम के बारे में बताया कि ड्रेसिंग रूम में विराट भाई साइलेंट किलर हैं. वो चुपचाप बीच में आकर मस्ती कर देते हैं और कोई जवाब भी नहीं दे पाता. माही भाई तसल्ली से मस्ती करते हैं. चहल ने कहा, 'सबसे ज्यादा मस्ती मैं रोहित भाई के साथ करता हूं.

हाल ही में खेले गए वर्ल्ड कप सेमीफाइनल में टीम इंडिया की हार के बारे में चहल ने कहा, जब न्यूजीलैंड के खिलाफ सेमीफाइनल मैच में धोनी भाई आउट होकर वापस लौट रहे थे तो वह पल बहुत ही दुखद था जिसे हम सभी भूलना चाहेंगे. चहल ने कहा कि वर्ल्ड कप सेमीफाइनल में जब माही भाई को आउट होकर जाते हुए देखा तो वो काफी दुखद पल था. मेरी आंखों में आंसू थे. जो वर्ल्ड कप में हुआ उसे मैं भूलना चाहूंगा और टी-20 वर्ल्ड कप अगर भारत में आ जाए तो बहुत अच्छा होगा.

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चहल ने कहा, 'मैं जब 7 साल का था तब से मैदान पर जाने का शौक था. चहल ने कहा, 'मैंने बहुत संघर्ष किया, जिसमें मेरे पिता ने बहुत साथ दिया.' सात वर्ष की छोटी उम्र से ही चहल को शतरंज और क्रिकेट दोनों में गहरी रुचि थी. वे अंडर-12 में नेशनल चेस चैंपियन रहे.  उन्होंने कोजीकोड में एशियन यूथ चैंपियनशिप में भाग लिया. इसके बाद चहल ने ग्रीस वर्ल्ड यूथ चैंपियनशिप में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया.

स्पॉन्सर नहीं मिलने की वजह से शतरंज खेलना छोड़ा

युजवेंद्र चहल शतरंज का उभरता सितारा था. चहल को शतरंज में आगे बढ़ने के लिए 50 लाख रु. सालाना की जरूरत थी, लेकिन उन्हें कोई स्पॉन्सर नहीं मिला. हालांकि इसके बावजूद चहल कंप्यूटर के सहारे चेस की बारीकियों को तलाशते रहे.

2013 के चैंपियंस लीग T-20 फाइनल में पहली बार सुर्खियों में आए

क्रिकेट में पहली बार चहल का नाम तब सुर्खियों में आया, जब उन्होंने चैंपियंस लीग टी-20 फाइनल में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के खिलाफ 3 ओवर में 9 रन देकर 2 विकेट निकाले. जिसकी बदौलत मुंबई इंडियंस ने 2013 का खिताब जीता. और इसी प्रदर्शन के सहारे चहल को रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु का कॉन्ट्रैक्ट मिल गया. जबकि 2016 में जिम्बाब्वे दौरे में उन्होंने पहला वनडे इंटरनेशनल खेला.

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