वर्ल्ड कप में टीम इंडिया का आगाज बेहद ही शानदार रहा, लेकिन अंत उतना ही खराब रहा. टीम की कई कमियां लगातार जीत के कारण छिपी रह गई जिसका असर सेमीफाइनल मैच में देखने को मिला. न्यूजीलैंड के खिलाफ मुकाबले में जीत के लिए मिले 240 रनों के लक्ष्य के जवाब में टीम इंडिया का टॉप ऑर्डर बिखर गया और सारा दबाव मध्यक्रम पर आ गया जो पहले ही पूरे टूर्नामेंट में नाकाम रहा.
चौथे नंबर का बल्लेबाजी क्रम उसी समय संकट में आ गया था जब ओपनर शिखर धवन दूसरे ही मैच के बाद चोटिल होने के बाद टूर्नामेंट से बाहर हो गए. धवन के घायल होने से कप्तान कोहली को टीम का बल्लेबाजी क्रम बदलना पड़ा. टीम इंडिया लोकेश राहुल को चौथे स्थान पर खिलाने के इरादे से टूर्नामेंट में दाखिल हुई थी, लेकिन धवन के घायल होने के बाद राहुल को पूरे टूर्नामेंट में ओपनिंग करनी पड़ी और चौथे स्थान का संकट कायम रहा.
धवन की चोट ने बढ़ाई थी कोहली की मुसीबत
ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मैच में शिखर धवन को बल्लेबाजी के दौरान अंगूठे में चोट लगी थी. धवन की चोट ने कप्तान कोहली की मुसीबत को बढ़ा दिया था. शानदार फॉर्म में रहे शिखर धवन को चोट लगने के बाद वर्ल्ड कप से बाहर कर दिया गया. शिखर धवन की जगह टीम इंडिया में ऋषभ पंत को शामिल किया.
शिखर धवन के घायल होने का असर ओपनिंग बल्लेबाजी के साथ-साथ नंबर 4 पर दिखा. धवन के घायल होने से नंबर 4 पर खेलने वाले लोकेश राहुल को बाकी के मैचों में ओपनिंग करनी पड़ी. राहुल के ओपनिंग करने से चौथा स्थान खाली हो गया. ऐसे में कप्तान कोहली ने इस स्थान पर विजय शंकर, ऋषभ पंत और हार्दिक पंड्या जैसे बल्लेबाजों को मौका दिया.
विजय शंकर और ऋषभ पंत चौथे नंबर पर पूरी तरह से फेल रहे. देखा जाए तो धवन का घायल होना टीम इंडिया को महंगा पड़ा और टीम पूरे टूर्नामेंट में इससे उबर नहीं पाई.
धवन के दम पर जीती थी टीम इंडिया
धवन ने ऑस्ट्रेलिया के साथ हुए मुकाबले में शानदार 117 रन बनाए थे और मैन ऑफ द मैच चुने गए थे. भारत ने वह मैच 36 रनों से जीता था. उसी मैच में बल्लेबाजी के दौरान आस्ट्रेलियाई गेंदबाज नेथन कोल्टर नाइल की एक गेंद धवन के अंगूठे पर लग गई थी. अपनी पारी के बाद धवन ड्रेसिंग रूम में ही बैठे रहे थे और बर्फ से चोट की सेकाई करते रहे. वह फील्डिंग के लिए मैदान पर नहीं उतर सके थे. रवींद्र जडेजा ने धवन के लिए फील्डिंग की थी.