आजतक के पिच फिक्सिंग पर खुलासे को लेकर क्रिकेट जगत में हड़कंप मच गया है. दुनिया के सबसे अमीर बोर्ड बीसीसीआई के लिए अब यह साख का सवाल है. यह कोई पहला मामला नहीं है जब पुणे की पिच को लेकर कोई विवाद हुआ है इससे पहले भी इस साल की शुरुआत में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच पुणे में खेला गया पहला टेस्ट मैच विवादों में घिर गया था. मैच रेफरी क्रिस ब्रॉड ने पुणे की पिच को खराब करार दिया था.
याद हो कि पुणे के महाराष्ट्र क्रिकेट एसोसिएशन स्टेडियम में खेला गया पहला टेस्ट तीसरे ही दिन समाप्त हो गया था. मेहमान टीम ने इसे 333 रन के विशाल अंतर से जीता था. यह पिच काफी ज्याादा टर्निंग ट्रेक था. मैच के दौरान कमेंटेटर्स ने बताया था कि पहले दिन की पिच ही बिलकुल वैसी नजर आ रही है, जैसी तीसरे दिन होती है.
दरअसल, पुणे में खेले गए भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच इस टेस्ट के पहले दो दिन में 24 विकेट गिरने से महाराष्ट्र क्रिकेट संघ स्टेडियम की पिच तैयार करने वाले तीनों क्यूरेटरों को लेकर सवाल उठे थे.
क्यूरेटर पांडुरंग सालगांवकर, बीसीसीआई के मुख्य क्यूरेटर दलजीत सिंह और पश्चिम क्षेत्र के क्यूरेटर धीरज प्रसन्ना ने यह पिच तैयार की थी. सालगांवकर ने पुणे टेस्ट मैच शुरू होने से दो दिन पहले घोषणा की कि पिच से पर्याप्त उछाल मिलेगी जिसे विरोधी टीम के कप्तान स्टीव स्मिथ ने बकवास करार दिया था.
कहा जा रहा था कि पिच से पहले दिन से टर्न मिलने लगेगा. दो दिन के खेल के बाद सालगांवकर का बयान गलत साबित हुआ जिससे यह कयास लगाये जाने लगे हैं कि क्या स्थानीय क्यूरेटर को पिच तैयार करने की छूट दी गई थी या दलजीत ने भारतीय टीम के कहने पर हस्तक्षेप किया था.
पुणे में क्रिकेट खेलने वाले एक पूर्व क्रिकेटर ने कहा था, ‘पांडुरंग सालगांवकर को पुणे में सपाट पिच तैयार करने के लिए जाना जाता है. जनवरी में भारत और इंग्लैंड के बीच वनडे मैच में दोनों टीमों ने 350 से अधिक का स्कोर बनाया था. आखिर पिच का मिजाज पूरी तरह से कैसे बदल गया.’
बीसीसीआई के एक सीनियर अधिकारी ने दलजीत की भूमिका पर सवाल उठाए थे उन्होंने कहा था, ‘‘क्या दलजीत को भारतीय टीम प्रबंधन से किसी खास तरह की पिच तैयार करने के निर्देश मिले थे या फिर उन्होंने सालगावकर को पिच को सूखी रखने की सलाह दी थी. मुझे नहीं लगता कि भारतीय टीम ने ऐसी पिच चाही होगी जो उसको नुकसान पहुंचाए.’