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वर्ल्ड कप के मौसम में DHONI vs ICC, कोई हार मानने को तैयार नहीं

वर्ल्ड कप का मौसम है लेकिन मौजूदा टूर्नामेंट में क्रिकेट के बदले धोनी के ग्लव्स ज्यादा सुर्खियां बटोर रहे हैं. धोनी के दस्तानों पर बलिदान बैज के निशान ने वर्ल्ड कप टूर्नामेंट को नया मोड़ दे दिया, जिससे विवाद ने जन्म ले लिया है.

MS Dhoni MS Dhoni

वर्ल्ड कप का मौसम है, लेकिन मौजूदा टूर्नामेंट में क्रिकेट के बदले महेंद्र सिंह धोनी के विकेटकीपिंग ग्लव्स ज्यादा सुर्खियां बटोर रहे हैं. धोनी के दस्तानों पर 'बलिदान बैज' के निशान ने वर्ल्ड कप टूर्नामेंट को नया मोड़ दे दिया, जिससे विवाद ने जन्म ले लिया है. एक तरफ धोनी हैं कि वह अपने ग्लव्स बदलने को तैयार नहीं हैं, जबकि आईसीसी (ICC) अपने रुख से पलटना नहीं चाह रही है. ऐसे में 'धोनी-आईसीसी' प्रकरण मौजूदा वर्ल्ड कप का सबसे बड़ा मुद्दा बन गया है.

बुधवार को साउथेम्प्टन में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ भारत के पहले मैच के दौरान धोनी को बलिदान बैज के साथ विकेटकीपिंग करते देखा गया था. आईसीसी ने धोनी को अपने दस्ताने से यह निशान हटाने को कहा था. लेकिन धोनी ने अपने ग्लव्स से इस निशान को हटाने से मना कर दिया. बीसीसीआई माही के समर्थन में उतरी है. बीसीसीआई के COA चीफ विनोद राय ने कहा, 'हम आईसीसी को एमएस धोनी को उनके दस्ताने पर 'बलिदान बैज' पहनने के लिए अनुमति लेने के लिए पहले ही चिट्ठी लिख चुके हैं.'

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ICC भी नहीं बदलेगा रुख

अब ICC के सूत्रों ने कहा कि नियमों के अनुसार अपील की कोई गुंजाइश नहीं है, लेकिन BCCI के पास ICC को पत्र लिखने का अधिकार है. इस मामले को तकनीकी समिति को सौंपा जाएगा. जिसमें जेफ एल्डर्स, डेविड रिचर्डसन, कुमार संगकारा, हर्षा भोगले और स्टीव एलवर्दी शामिल हैं, लेकिन यह बहुत संभावना नहीं है कि वे अपना रुख बदल देंगे.

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वरिष्ठ आईसीसी सूत्रों का कहना है कि संस्था किसी भी तरह से इस पर पुनर्विचार करने वाला नहीं है, क्योंकि कोई अन्य टीम भी ऐसा कुछ कह सकती है और ICC को इसे अनुमति देनी होगी. इसके बाद खेल के मैदान में भी धार्मिक या राजनीतिक संदेश जाएगा, जिस पर ICC कभी अनुमति नहीं दे सकती. तो यह लगभग तय है कि आईसीसी इस पर अपना रुख नहीं बदलेगी. हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि BCCI ने अभी तक इस पर कोई औपचारिक अपील नहीं की है.

इंडियन आर्मी ने ये कहा -

दूसरी तरफ इंडियन आर्मी धोनी के ग्लव्स पर लगे इस निशान को बलिदान बैज नहीं मानती. इंडियन आर्मी के सूत्रों के मुताबिक यह स्पेशल फोर्सेज का प्रतीक चिह्न है जो मरून रंग में होता है और इसे हिंदी में लिखा जाता है. यह हमेशा छाती पर पहना जाता है. धोनी के दस्ताने पर निशान पैरा स्पेशल फोर्सेज का प्रतीक चिह्न है.

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बीसीसीआई के बाद खेल मंत्रालय ने भी धोनी का समर्थन किया था. खेल मंत्री किरण रिजिजू ने कहा, 'खेल निकायों के मामलों में सरकार हस्तक्षेप नहीं करती है, वे स्वायत्त हैं. लेकिन जब मुद्दा देश की भावनाओं से जुड़ा होता है, तो राष्ट्र के हित को ध्यान में रखना होता है. मैं बीसीसीआई से आईसीसी में इस मामले को उठाने का अनुरोध करना चाहूंगा.'

धोनी ने क्यों लगाया बलिदान बैज

भारतीय टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को क्रिकेट में उनकी उपलब्धियों के कारण 2011 में प्रादेशिक सेना में मानद लेफ्टिनेंट कर्नल की रैंक दी गई थी. धोनी यह सम्मान पाने वाले कपिल देव के बाद दूसरे भारतीय क्रिकेटर हैं. धोनी को मानद कमीशन दिया गया क्योंकि वह एक युवा आइकन हैं और वह युवाओं को सशस्त्र बलों में शामिल होने के लिए प्रेरित कर सकते हैं. धोनी एक प्रशिक्षित पैराट्रूपर हैं. उन्होंने पैरा बेसिक कोर्स किया है और पैराट्रूपर विंग्स पहनते हैं.

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महेंद्र सिंह धोनी ने प्रादेशिक सेना (टीए) की 106 पैराशूट रेजिमेंट में मानद लेफ्टिनेंट कर्नल के रूप में अपनी रैंक को साबित कर दिखाया है. धोनी अगस्त 2015 में प्रशिक्षित पैराट्रूपर बन गए थे. आगरा के पैराट्रूपर्स ट्रेनिंग स्कूल (पीटीएस) में भारतीय वायु सेना के एएन-32 विमान से पांचवीं छलांग पूरी करने के बाद उन्होंने प्रतिष्ठित पैरा विंग्स प्रतीक चिह्न (Para Wings insignia) लगाने की अर्हता प्राप्त कर ली थी. यानी इसी के साथ धोनी को इस बैज के इस्तेमाल की योग्यता हासिल हो गई.

गौरतलब है कि तब धोनी 1,250 फीट की ऊंचाई से कूद गए थे और एक मिनट से भी कम समय में मालपुरा ड्रॉपिंग जोन के पास सफलतापूर्वक उतरे थे. नवंबर 2011 में धोनी को प्रादेशिक सेना (TA) में लेफ्टिनेंट कर्नल के मानद रैंक से सम्मानित किया गया था. तब उन्होंने कहा था कि वह सेना में अधिकारी बनना चाहते थे, लेकिन किस्मत ने उन्हें क्रिकेटर बना दिया.

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