चेपॉक की रात…
स्टैंड्स में शोर था, हूटिंग थी, ‘विसल पोडू’ की गूंज थी. लेकिन मैच खत्म होने के बाद सबसे ज्यादा चर्चा किसी विकेट, कैच या छक्के की नहीं हुई. चर्चा हुई ईशान किशन के उस सेलिब्रेशन की, जिसने सोशल मीडिया को दो हिस्सों में बांट दिया.
सनराइजर्स हैदराबाद (SRH) ने 18 मई को चेपॉक में चेन्नई सुपर किंग्स को 5 विकेट से हराकर प्लेऑफ का टिकट पक्का किया. जीत के बाद ईशान ने स्टैंड्स की तरफ देखा, उंगलियों से ‘विसल पोडू’ का इशारा किया और फिर हाथ से दर्शकों को ‘घर जाने’ का संकेत दे दिया.
Ishan Kishan 🤷 pic.twitter.com/7gXIZO53zS
— CricketGully (@thecricketgully) May 18, 2026
बस… यहीं से बहस शुरू हो गई.
किसी ने इसे एटीट्यूड कहा, किसी ने बदतमीजी. लेकिन रविचंद्रन अश्विन ने इस पूरे विवाद को बिल्कुल अलग नजरिए से देखा.
अश्विन ने साफ कहा-
'यार, जाने दीजिए… यही तो खेल का मजा है.'
उनकी बात सिर्फ ईशान के बचाव तक सीमित नहीं थी, बल्कि खेल की उस भावना पर थी, जिसे अक्सर फैन वॉर्स और सोशल मीडिया की बहसें निगल जाती हैं. अश्विन के मुताबिक, अगर कोई खिलाड़ी आपके होम ग्राउंड पर जीतकर इतने जोश से सेलिब्रेट कर रहा है, तो इसे अपमान नहीं, सम्मान की तरह देखना चाहिए.
उन्होंने एक कार्यक्रम के दौरान कहा, 'सोचिए… कोई टीम चेपॉक में आकर जीतती है और इतना इमोशनल होकर रिएक्ट करती है. इसका मतलब है कि चेन्नई को हराना अभी भी कितना बड़ा काम माना जाता है.'
अश्विन ने यह भी माना कि ईशान थोड़ा कंट्रोल रख सकते थे. भीड़ के साथ सीधे इशारों में संवाद शायद टाला जा सकता था. लेकिन उन्होंने तुरंत यह भी जोड़ दिया कि ऐसे पल ही क्रिकेट की राइवलरी को जिंदा रखते हैं.
'अगर ये सब नहीं होगा, तो तमाशा कहां रहेगा? मजा कहां रहेगा?'
दरअसल, यह सिर्फ एक सेलिब्रेशन नहीं था. इसके पीछे दबाव, हूटिंग, जवाब और भावनाओं का पूरा मिश्रण था. मैच के दौरान ईशान को लगातार चेपॉक की भीड़ से रिएक्शन मिल रहे थे. लेकिन उन्होंने बल्ले से जवाब दिया- 47 गेंदों पर 70 रन, 7 चौके, 3 छक्के और एक मैच जिताऊ पारी.
इस सीजन में ईशान किशन का प्रदर्शन भी शानदार रहा है. 13 मैचों में लगभग 180 की स्ट्राइक रेट से 490 रन… और अब प्लेऑफ में पहुंची हैदराबाद की टीम में उनकी भूमिका सबसे अहम बन चुकी है.
शायद इसलिए जीत के बाद वह भावनाएं रोक नहीं पाए.
और शायद इसलिए अश्विन ने भी इस पूरे मामले को सिर्फ एक सेलिब्रेशन की तरह नहीं, बल्कि क्रिकेट की आत्मा की तरह देखा.
क्योंकि खेल सिर्फ स्कोरबोर्ड से नहीं चलता…
थोड़ा जुनून, थोड़ा ड्रामा और थोड़ा तंज भी चाहिए होता है.