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सबसे बुजुर्ग टेस्ट क्रिकेटर इलीन इलीन ऐश का निधन, द्वितीय विश्व युद्ध में की थी जासूसी

दुनिया की सबसे उम्रदराज टेस्ट क्रिकेटर इलीन ऐश का 110 साल की उम्र में निधन हो गया। इंग्लैंड एवं वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ECB) ने शनिवार को यह जानकारी दी. ऐश ने द्वितीय विश्व युद्ध से पहले और बाद में इंग्लैंड के लिए सात टेस्ट मैच खेले थे. इस दौरान उन्होंने 23 की औसत से 10 विकेट चटकाए. 

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Eileen Ash (File Photo) Eileen Ash (File Photo)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • सबसे उम्रदराज टेस्ट क्रिकेटर इलीन ऐश का हुआ निधन
  • इंग्लैंड के लिए सात टेस्ट मैचों में किया प्रतिनिधित्व

दुनिया की सबसे उम्रदराज टेस्ट क्रिकेटर इलीन ऐश का 110 साल की उम्र में निधन हो गया। इंग्लैंड एवं वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ECB) ने शनिवार को यह जानकारी दी. ऐश ने द्वितीय विश्व युद्ध से पहले और बाद में इंग्लैंड के लिए सात टेस्ट मैच खेले थे. इस दौरान उन्होंने 23 की औसत से 10 विकेट चटकाए.

ऐश ने 1937 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पदार्पण किया था और निधन के समय वह दुनिया की सबसे उम्रदराज टेस्ट क्रिकेटर थीं. वह 1949 में एशेज दौरे पर ऑस्ट्रेलिया गई टीम का हिस्सा थीं. इसके अलावा उन्होंने घरेलू क्रिकेट में 'सिविल सर्विस वुमेन, 'मिडिलसेक्स वुमेन' और 'साउथ वुमेन' का प्रतिनिधित्व किया था.

ईसीबी ने एक बयान में कहा, 'इंग्लैंड एवं वेल्स क्रिकेट बोर्ड इलीन ऐश के 110 साल की उम्र में निधन से काफी दुखी है.' लंदन में जन्मीं इस खिलाड़ी ने 2017 महिला विश्व कप फाइनल से पहले घंटी भी बजायी थी, जिसमें इंग्लैंड की टीम ने रोमांचक मुकाबले में भारत को मात दी थी.

अपने क्रिकेट करियर के अलावा ऐश ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान गुप्त खुफिया सेवा 'एमआई6' के लिए भी काम किया था. इंग्लैंड की पूर्व क्रिकेटर क्लेयर कोनोर ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है, जो ईसीबी की महिला क्रिकेट की प्रबंध निदेशक और मेरिलबोन क्रिकेट क्लब की अध्यक्ष भी हैं.

कोनोर ने कहा, 'मुझे आज उन्हें अलविदा कहते हुए बहुत दुख हो रहा है. हीदर नाइट (इंग्लैंड वूमेन्स टीम की कप्तान) और मैं 2017 आईसीसी महिला विश्व कप से लगभग छह महीने पहले इलीन से मिलने गए थे. वह उस समय 105 वर्ष की थीं और यह सबसे उल्लेखनीय अनुभवों में से एक था.


'इलीन ने हीदर को योग सिखाया, हमने स्नूकर खेला, हमने चाय पी और हमने अखबारों और स्क्रैपबुक के माध्यम से 1930-40 के दशक में एक खिलाड़ी के रूप में इलीन के जश्न मनाते पलों को याद किया.'

कोनोर ने आगे बताया, 'उन्होंने हमें कुछ अद्भुत कहानियों से रूबरू कराया, जिसमें यह भी शामिल है कि कैसे वह 1949 में सिडनी में एक फ्रांसीसी रेस्तरां में सर डॉन ब्रैडमैन से अपने बल्ले पर ऑटोग्राफ लेने के लिए आई थीं. मुझे पता है कि हम में से कोई भी उस दिन को कभी नहीं भूल पाएगा, यह इतना खास था.'




 

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