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भारत-इंग्लैंड सीरीज पर खतरा, BCCI ने ECB से कहा- अपना खर्चा खुद उठाओ

भारत और इंग्लैंड के बीच नौ अक्टूबर से पांच टेस्ट मैच की सीरीज शुरू हो रही है. लेकिन इस पर बोर्ड ने राजनीति शुरू कर दी है. बीसीसीआई ने इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड (ईसीबी) के मैनेजर फिल नील को पत्र लिखकर यह जानकी दी है कि सुप्रीम कोर्ट ने बीसीसीआई पर कुछ पाबंदियां लगाई हैं.

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अजय शिर्के और अनुराग ठाकुर अजय शिर्के और अनुराग ठाकुर

भारत और इंग्लैंड के बीच नौ अक्टूबर से पांच टेस्ट मैच की सीरीज शुरू हो रही है. लेकिन इस पर बोर्ड ने राजनीति शुरू कर दी है. बीसीसीआई ने इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड (ईसीबी) के मैनेजर फिल नील को पत्र लिखकर यह जानकी दी है कि सुप्रीम कोर्ट ने बीसीसीआई पर कुछ पाबंदियां लगाई हैं. जिसके चलते मेहमान टीम को कुछ सुविधाएं नहीं दी जा सकती हैं. जो उसे मिलनी चाहिए. वहीं इंग्लैंड के मैनेजर फिल नील ने भी बीसीसीआई सचिव अजय शिर्के को वापस चिठ्ठी लिखी है. जिसमें लिखा गया है की ईसीबी विकल्पों पर विचार कर रहा है.

शिर्के ने ईसीबी को पत्र लिखा
बीसीसीआई सचिव अजय शिर्के ने नील को पत्र लिखा. जिसमें लिखा है कि इंग्लैंड टीम का आगामी सीरीज के लिए स्वागत किया लेकिन आगे उन्होंने लिखा, 'बीसीसीआई फिलहाल भारतीय क्रिकेट बोर्ड और ईसीबी के बीच एमओयू को लागू करने की स्थिति में नहीं है. क्योंकि लोढा समिति इसे स्वीकृति नहीं दी है. जिसे सुप्रीम कोर्ट ने बीसीसीआई के मामले देखने के लिए आडिटर की नियुक्ति की जिम्मेदारी सौंपी है.

इंग्लैंड के होटल और रहने का इंतेजाम किया
शिर्के ने कहा कि इंग्लैंड टीम को होटल, यात्रा व अन्य कुछ सुविधाएं दे दी गई हैं लेकिन एएमओयू लागू होने तक बीसीसीआई इसका भुगतान करने का वादा नहीं कर सकती. कृपया इन सुविधाओं का भुगतान करने का बंदोबस्त करें. लोढ़ा कमेटी से निर्देश मिलने के बाद बीसीसीआई आपको आगे की जानकारी देगी. मैं बीसीसीआई की ओर से आपको होने वाले कष्ट के लिए माफी मांगता हूं. जब भी कोई विदेशी टीम भारत आती है तो उसके रहने, यात्रा और अन्य खर्चों का भुगतान बीसीसीआई करती है.

बीसीसीआई ने लिखा था क्रिकेट संघों को पत्र
इससे पहले बीसीसीआई ने सौराष्ट्र, आंध्र, पंजाब, मुंबई और तमिलनाडु के क्रिकेट संघो को पत्र लिखकर पूछा था कि क्या वो इंग्लैंड और भारत के बीच होने वाले टेस्ट मैच का खर्चा उठा सकते हैं या नहीं. इंग्लैंड टीम के दौरे को लेकर इंग्लैंड एवं वेल्स क्रिकेट बोर्ड के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर तब तक नहीं किया जा सकता जब तक कि लोढा समिति इसे स्वीकृति नहीं दे जिसे उच्चतम न्यायालय ने बीसीसीआई के मामले देखने के लिए आडिटर की नियुक्ति की जिम्मेदारी सौंपी है.

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