रिंकू सिंह को भले ही भारतीय टीम में खेलने के मौके कम मिले हों, लेकिन जब भी मौका मिलता है, वह डेथ ओवरों में अपनी छाप छोड़ने से पीछे नहीं हटते. इसका ताजा उदाहरण नागपुर में न्यूजीलैंड के खिलाफ पहले टी20 मैच में देखने को मिला, जहां उन्होंने सिर्फ 20 गेंदों में 44 रन बनाकर खेल का रुख पलट दिया. (Photo, PTI)
दरअसल, बेंच पर शांत चेहरे के पीछे छिपा विस्फोटक फिनिशर- रिंकू सिंह जब भी मौका मिला, मैच का रुख मोड़कर आए. पावर हिटिंग, नर्व कंट्रोल और डेथ ओवर्स में प्रेशर गेम… यही वजह है कि चयनकर्ता अब उन्हें आने वाले T20 वर्ल्ड कप में टीम इंडिया के ‘सीक्रेट वेपन’ के तौर पर देख रहे हैं. (Photo, PTI)
सितंबर में एशिया कप में एकमात्र गेंद पर चौका लगाकर भारत को जीत दिलाने के बाद रिंकू ऑस्ट्रेलिया में टी20 सीरीज के ज्यादातर मैचों में बेंच पर ही बैठे रहे. जिस एकमात्र मैच में उन्हें प्लेइंग इलेवन में जगह मिली, उसमें उन्हें बल्लेबाजी का मौका नहीं मिला. (Photo, PTI)
नागपुर में उन्होंने सबको चौंकाते हुए 20 गेंदों में नाबाद 44 रनों की मैच-टिल्टिंग पारी खेली. डेरिल मिचेल के ओवर में दो छक्के और एक चौका लगाकर भारत को 7 विकेट पर 238 रन तक पहुंचाने में मदद की. (Photo, PTI)
टीम में जगह हमेशा आसान नहीं रही. शुभमन गिल के होने से रिंकू के लिए अंतिम एकादश में जगह बनाना मुश्किल था. अब गिल की गैरमौजूदगी ने रिंकू के लिए रास्ता खोल दिया. इससे टीम प्रबंधन संजू सैमसन को सलामी बल्लेबाज के रूप में ज्यादा समय दे सकता है, जबकि निचले क्रम में रिंकू और हार्दिक पंड्या जैसे अनुभवी फिनिशर मौजूद हैं. (Photo, PTI)
रिंकू की सबसे बड़ी ताकत यह है कि वह तेज गेंदबाजों के खिलाफ पहली गेंद से ही लय पकड़ लेते हैं. पूर्व ऑफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने अपने यूट्यूब चैनल पर कहा, 'हार्दिक पंड्या फिनिशर के रूप में शानदार हैं. अब जब संजू सैमसन शीर्ष क्रम में हैं और ईशान किशन वापस विकेटकीपर बल्लेबाज के रूप में आ गए हैं, तो आखिरी ओवरों में फिनिशर की जरूरत है. रिंकू से बेहतर यह कौन कर सकता है.' (Photo, PTI)