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मौत पर इंसानों की तरह दुख मनाते हैं हाथी, पहली बार हुए ये नए खुलासे

इंसानों की तरह ही हाथी भी अपने समूह के जीव के मरने पर दुख जताते हैं. ये समूह में अपना दुख प्रकट करते हैं. कई तरह की हरकतें करते हैं. आंसू बहाते हैं और चिंघाड़ते हैं. रोते-बिलखते हैं. वैज्ञानिकों ने इनका वीडियो बनाकर इनके इस सामूहिक दुख जताने की प्रक्रिया की स्टडी की है. आइए जानते हैं क्या रोचक जानकारियां सामने आई हैं.

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अपने साथी की मौत पर एक दूसरे को सहारा देते एशियाई हाथी. (फोटोः नचिकेता शर्मा/क्योटो यूनिवर्सिटी) अपने साथी की मौत पर एक दूसरे को सहारा देते एशियाई हाथी. (फोटोः नचिकेता शर्मा/क्योटो यूनिवर्सिटी)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • एशियाई हाथियों पर अमेरिका-जापान की स्टडी
  • दुख में अलग-अलग तरह से प्रतिक्रिया देते हैं हाथी

ये बात साल 2013 की है, तब संजीता पोखारेल ने पहली बार एशियाई हथिनी के मरने पर हाथियों के झुंड को विलाप करते देखा था. उनकी प्रतिक्रियाओं का वीडियो बनाया था. यह मादा हाथी संक्रमण की वजह से एक भारत के एक वन्य जीव अभ्यारण्य में मर गई थी. इसके शव के चारों तरफ युवा हाथी और झुंड के अन्य हाथी गोल घेरे में चक्कर लगा रहे थे. 

स्मिथसोनियन कंजरवेशन बायोलॉजी इंस्टीट्यूट की बायोलॉजिस्ट डॉ. संजीता पोखारेल ने कहा कि ये नजारा देख कर हमसे रहा नहीं गया. हमने एक उचित दूरी से पूरी घटना का वीडियो बनाया. संजीता के साथ जापान के क्योटो यूनिवर्सिटी में वाइल्डलाइफ बायोलॉजिस्ट नचिकेता शर्मा भी थे. दोनों इस बारे में और अध्ययन करना चाहते थे. क्योंकि ऐसा नजारा हमेशा देखना मुश्किल होता है. क्योंकि हाथी अक्सर घने जंगलों में रहते हैं. या फिर घास वाले मैदानों में. 

हाथियों में सामाजिक बंधन बहुत मजबूत होता है. हर झुंड में प्रेम और सुरक्षा की भावना भरी होती है. (प्रतीकात्मक फोटोः पेक्सेल)
हाथियों में सामाजिक बंधन बहुत मजबूत होता है. हर झुंड में प्रेम और सुरक्षा की भावना भरी होती है. (फोटोः पेक्सेल)

शव के चारों तरफ चक्कर लगाते हैं हाथी

दोनों की स्टडी रिपोर्ट रॉयल सोसाइटी ओपन साइंस जर्नल में प्रकाशित हुई है. दोनों बायोलॉजिस्ट ने दुनिया भर के लोगों से अपील की कि वो हाथियों के दुख जताने के वीडियो उन्हें यूट्यूब के जरिए भेज दें. इसके बाद उनके पास कई वीडियो आए जिसमें हाथियों के अलग-अलग रिएक्शन देखने को मिले. हाथी शव को छूते थे. उनके चारों तरफ चक्कर लगाते थे. सुरक्षा देते दिखे. उसे उठाने के लिए लात मारते दिखे. यहां तक कांपते हुए भी दिखाई दिए. 

शावक मरे तो हथिनी उठाकर घूमती है

अगर शावक हाथी मर जाता है तो उसकी मां हथिनी उसे अपनी सूंड़ से उठाकर घूमती भी है. इस तरह की स्टडी को कंपेरेटिव थानाटोलॉजी (Comparative Thanatology) कहते हैं. इसमें अलग-अलग जीवों के मरने पर उनके प्रति उनके साथी जीवों का क्या रिएक्शन रहता है, उसकी स्टडी की जाती है. डॉ. पोखारेल कहती हैं कि एशियाई हाथियों की तो कई कहानियां है. दुनियाभर के अखबारों में उनके रिएक्शन की कहानियां पब्लिश हुई हैं. 

किसी हाथी के मरने पर उसके चारों तरफ सुरक्षा घेर बनाकर घूमते हैं हाथी. (फोटोः पेक्सेल)
किसी हाथी के मरने पर उसके चारों तरफ सुरक्षा घेर बनाकर घूमते हैं हाथी. (फोटोः पेक्सेल)

ज्यादातर चेहरे और कान को छूते हैं

यूट्यूब पर मिले वीडियो के जरिए दोनों बायोलॉजिस्ट ने हाथी के मरने पर अन्य हाथियों के रिएक्शन के 24 केस निकाले. इस स्टडी में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस के रमन कुमार भी शामिल हुए. तीनों ने मिलकर नतीजा ये निकाला कि हाथी अपने साथियों के मरने पर जो सबसे सामान्य प्रतिक्रिया देते हैं, वो है छूना और सूंघना. हाथी आमतौर पर मृत हाथी के चेहरे और कान को छूते और सूँघते हैं. 

शव को हिलाते रहते हैं, ताकि उठे

युवा हाथी अपने पैरों से शव को हिलाने की कोशिश करते हैं. तीन मामले ऐसे देखने को मिले जिसमें बच्चे के मरने पर मादा हाथी उसे लगातार पैर मारकर उठाने का प्रयास करती दिखी. कई बार तो पूरे-पूरे दिन उसे उठाकर चलती रहती है. इस उम्मीद में की वो जीवित हो जाएगा. डॉ. पोखारेल कहती हैं कि एशियाई हाथी जीवित रहने पर भी छू कर अपनी संवेदनाओं को प्रकट करते हैं. ये एकदूसरे से विपरीत दिशा में सोते हैं लेकिन इनके सूंड़ एकदूसरे को छूते रहते हैं. कई बार सूंड़ को आपस में बांध लेते हैं. 

दूसरी सबसे बड़ी प्रतिक्रिया है चिंघाड़ना. शोर मचाना. हाथियों का समूह मरे हुए हाथी के चारों तरफ एक सुरक्षा घेरा बनाते हैं. नजदीक रहते हैं और फिर जोर से चिल्लाना शुरु करते हैं. अगर कोई इंसान या अन्य जानवर इस बीच आता है तो उसकी खैर नहीं. उसका पीछा करते हैं. कुछ मृत हाथी को उठाकर खिसकाने का प्रयास करते हैं ताकि शव के साथ कोई जानवर या इंसान कुछ गलत न कर सके. 

 

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