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साइंस न्यूज़

कोरोना पर केंद्र को मार्च की शुरुआत में ही मिली थी चेतावनी, नहीं हुआ एक्शन!

Corona India Scientists Warning
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भारतीय वैज्ञानिकों के एक पैनल ने मार्च की शुरुआत में ही खतरनाक, नए और घातक कोरोना वायरस वैरिएंट की चेतावनी केंद्र सरकार को दी थी लेकिन इस पर ध्यान नहीं दिया गया. ब्रिटिश मीडिया संस्थान द गार्जियन ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स के हवाले से यह रिपोर्ट दी है. रिपोर्ट के मुताबिक चार भारतीय वैज्ञानिकों ने भारत सरकार को कहा था कि बड़े स्तर पर प्रतिबंध लगाने की जरूरत है ताकि कोरोना वायरस के नए वैरिएंट के फैलाव को रोका जा सके. (फोटोःगेटी)

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रॉयटर्स ने शनिवार यानी 1 मई 2021 को रिपोर्ट दी कि वैज्ञानिकों की इस चेतावनी के बावजूद लाखों लोग धार्मिक त्योहारों, खेल आयोजनों और राजनीतिक रैलियों में बिना मास्क के शामिल हुए. इसके अलावा कृषि कानून के खिलाफ हजारों किसानों का विरोध प्रदर्शन भी जारी रहा. (फोटोःगेटी)

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दुनिया के दूसरे सबसे ज्यादा आबादी वाले देश में इस साल कोरोना का संक्रमण पिछले साल की तुलना में ज्यादा तेजी से फैला. देश में कोरोना की यह बुरी स्थिति ब्रिटेन के वैरिएंट और भारत में इसके बाद बने दो नए म्यूटेंट वैरिएंट्स की वजह से बनी. (फोटोःगेटी)

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30 अप्रैल को भारत में एक दिन में कोरोना वायरस के 401,993 केस आए. यह दुनिया में एक रिकॉर्ड है. इसके अलावा पिछले 24 घंटों में कोरोना वायरस के नए वैरिएंट्स की वजह से 3523 लोगों की मौत हो गई. इस बीच खबर आई कि गुजरात के भरूच के एक अस्पताल में कोविड वार्ड में आग लगी. इसमें 18 मरीजों की मौत हो गई. (फोटोःगेटी)

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साल 2014 में पद संभालने के बाद यह देश का सबसे बड़ा संकट है. कोरोना वायरस को संभालने में फेल रहने को लेकर केंद्र और राज्य सरकारों के खिलाफ जनता आवाज उठा रही है. अस्पतालों में बेड नहीं है. मरीजों के लिए ऑक्सीजन की कमी है. श्मशान घाटों, शवदाह गृहों और कब्रिस्तानों में शवों के अंतिम संस्कार के लिए जगह नहीं बची है.  (फोटोःएपी)

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उत्तर भारत के एक रिसर्च सेंटर के डायरेक्टर ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि मार्च के शुरुआत में नए वैरिएंट के बारे में भारत जेनेटिक कंसोर्टियम Insacog ने चेतावनी दी थी. ये चेतावनी भारत सरकार के उच्च अधिकारियों को भेजी गई थी, जो सीधे पीएम को रिपोर्ट करते हैं. रॉयटर्स ने कहा कि वो इस बात को पुष्ट नहीं कर सकता कि Insacog के वैज्ञानिकों ने पीएम मोदी के अधिकारियों या उन्हें चेतावनी दी थी या नहीं. क्योंकि पीएम मोदी के ऑफिस से रॉयटर्स को इस बारे में कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली. (फोटोःगेटी)

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Insacog की स्थापना भारत सरकार ने पिछले साल दिसंबर में की थी. यह साइंटिफिक एडवाइजर्स का एक फोरम है, जो कोरोना वायरस के जिनोमिक वैरिएंट्स के खतरों के बारे में बताता है. Insacog देश की 10 बड़े प्रयोगशालाओं को एक साथ लेकर आया ताकि कोरोना वायरस के वैरिएंट्स की स्टडी की जा सके. उसकी भयावहता और इलाज संबंधी जानकारियां सरकार को दे सके, ताकि वैरिएंट्स के मुताबिक सरकार नीतियां तय कर सके. (फोटोःएपी)

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इंस्टीट्यूट ऑफ लाइफ साइंसेस के डायरेक्टर और Insacog के सदस्य अजय पारिदा ने बताया कि फरवरी की शुरुआत में ही भारतीय कोरोना वायरस के नए वैरिएंट B.1.617 की खोज कर ली गई थी. इस वैरिएंट के बारे में स्वास्थ्य मंत्रालय के अधीन आने वाले नेशनल सेंटर फॉर डिजीस कंट्रोल (NCDC) को 10 मार्च को बताया गया था.  (फोटोःगेटी)

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10 मार्च के आसपास Insacog ने एक मीडिया ड्राफ्ट तैयार किया था, जिसकी कॉपी रॉयटर्स ने देखी है. इस ड्राफ्ट में बताया गया है कि भारतीय वैरिएंट B.1.617 ने दो नए म्यूटेंट वैरिएंट्स बना लिए हैं. ये शरीर की कोशिकाओं में आसानी से चिपक कर लोगों को ज्यादा तेजी से संक्रमित कर रहे हैं. (फोटोःगेटी)

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ड्राफ्ट में बताया गया था कि इन म्यूटेशन का नाम है E484Q और L452R. ये म्यूटेशन 'गंभीर चिंता का विषय' हैं. वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी थी कि दोनों म्यूटेंट वायरस काफी आसानी से लोगों के शरीर में प्रवेश कर रहे हैं. ये इंसान के प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यून सिस्टम को बुरी तरह से प्रभावित कर रहे हैं. लेकिन स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह जानकारी करीब 2 हफ्ते बाद 24 मार्च को सार्वजनिक की. मंत्रालय के मीडिया स्टेटमेंट में 'गंभीर चिंता' शब्द को शामिल नहीं किया गया था.  (फोटोःगेटी)

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स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी स्टेटमेंट में सिर्फ यह कहा गया था कि ये दोनों म्यूटेंट वैरिएंट ज्यादा दिक्कत कर सकते हैं. इसलिए ज्यादा टेस्टिंग और क्वारनटाइन के नियमों को और बढ़ाया गया. जब Insacog के साइंटिफिक एडवाइजरी ग्रुप के चेयर शाहिद जमील ने पूछा गया कि नए वैरिएंट की चेतावनी और स्टडी रिपोर्ट पर सरकार ने क्यों सख्त कदम नहीं उठाए. इस पर शाहिद जमील ने कहा कि मैं इस बात से खुद हैरान था कि क्यों अथारिटीज इस बात पर ध्यान नहीं दे रही हैं. (फोटोःगेटी)

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शाहिद ने कहा कि बतौर वैज्ञानिक हमारा काम था नए वैरिएंट्स के बारे में रिपोर्ट देना. इसके सबूत देना. हमने वो किया लेकिन नीतियां बनाना, सख्त कदम उठाना, लॉकडाउन या रेस्ट्रिक्शन लगाने का फैसला सरकार को लेना था. ये उनका काम है. मुझे ये पता है कि मेरे अधिकार की सीमा कहां तक है. (फोटोःगेटी)

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उत्तर भारत के एक रिसर्च सेंटर के डायरेक्टर ने नाम न छापने की शर्त पर  रॉयटर्स को बताया कि ड्राफ्ट मीडिया रिलीज को देश के सबसे उच्च ब्यूरोक्रेट कैबिनेट सेक्रेटरी राजीव गौबा को भेजा गया था. राजीव गौबा सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को रिपोर्ट करते हैं. लेकिन जब इस बारे में राजीव गौबा से प्रतिक्रिया लेने का प्रयास किया गया तब उन्होंने रॉयटर्स को कोई जवाब नहीं दिया. (फोटोःगेटी)

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केंद्र सरकार ने लोगों के जमावड़े को लेकर कोई प्रतिबंध नहीं लगाए. जिसकी वजह से कोरोना संक्रमण 1 अप्रैल के बाद से चार गुना तेजी से फैलने लगा. देश के शीर्ष राजनेता पूरे मार्च और अप्रैल में चुनावी रैलियां करते रहे. सरकार ने कुंभ के आयोजन की अनुमति दी. हजारों किसान दिल्ली के बाहर तंबू लगाकर अब भी जुटे हुए हैं. (फोटोःगेटी)

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नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ कॉलेरा एंड एंटरिक डिजीसेस के मेडिकल रिसर्च साइंटिस्ट शांता दत्ता ने बताया कि हम बेहद बुरी स्थिति में है. देश के लोग साइंटिस्ट्स से ज्यादा नेताओं की बातें सुनते हैं. इस समय भारतीय कोरोना वायरस वैरिएंट दुनिया के 17 देशों में पहुंच गया है. इसमें ब्रिटेन, स्विट्जरलैंड और ईरान जैसे देश भी शामिल हैं. इसके बाद कई देशों ने भारत से आने वालों लोगों के लिए अपनी सीमाएं और हवाई यात्राएं बंद कर दीं. (फोटोःगेटी)