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साइंस न्यूज़

California: पानी में बना यह गड्ढा क्या 'धरती के केंद्र' में जाता है, जानिए इसकी सच्चाई

Bizarre whirlpool glory hole
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कैलिफोर्निया के नापा वैली (Napa Valley) में एक बांध है. जिसका नाम है मॉन्टीसेलो डैम (Monticello Dam). यह डैम लेक बेरिसा (Lake Berryessa) पर बनाया गया है. इस लेक में एक तेज भंवर उठा. कुछ ही मिनटों में यह भंवर एक बड़े गड्ढे में बदल गया. जो सीधे झील की तलहटी तक जा रहा था. मानो इसका कनेक्शन सीधे धरती के केंद्र से हो गया हो. (फोटोः गेटी)

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इस गड्ढे को स्थानीय लोग 'ग्लोरी होल' (Glory Hole) कहते हैं. यह कोई नरक का द्वार नहीं है. असल में इस गड्ढे की कहानी बड़ी रोचक है. आमतौर पर बांधों पर किनारे की तरफ दरवाजे बनाए जाते हैं, ताकि अधिक पानी होने पर उन्हें निकाला जा सके. यह एक बेहद पारंपरिक तरीका है. लेकिन यहां कहानी एकदम अलग और साइंटिफिक है. (फोटोः पिक्साबे)

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मॉन्टीसेलो डैम (Monticello Dam) को 1950 के दशक में बनाया गया था. तब इसे बनाने वाले इंजीनियरों ने किनारे मौजूद दरवाजों के बजाय डैम के जलग्रहण क्षेत्र के बीच में एक स्पिलवे (Spillway) बनाया. ताकि जब भी पानी की मात्रा अधिक हो. इस स्पिलवे के अंदर मौजूद दरवाजे को खोल दिया जाए. पानी गोल गड्ढे से होता हुआ बाहर की ओर चला जाएगा. (फोटोः गेटी)

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मॉन्टीसेलो डैम (Monticello Dam) दो क्लिफ के बीच में बनी घाटी पर बनाया गया है. इसे डेविल्स गेट कहते हैं. यहां पर बांध के दरवाजे बनाने की जगह नहीं थी. तो इस बांध को बनाने वालों के दिमाग में एक आइडिया आया. जैसे बाथटब में पानी निकालने के लिए नीचे की तरफ एक जालीदार छेद दिया जाता है. जिसमें आप कैप लगाकर पानी का बहाव रोक देते हैं. कैप हटाते ही पानी भंवर बनाते हुए बाथटब से बाहर निकल जाता है. ठीक उसी तरह इस डैम का यह गड्ढा काम करता है. (फोटोः गेटी)

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इस बांध पर बने इस गड्डे को हेल-माउथ (Hell-Mouth) यानी नरक के मुंह की तरह बेल-माउथ (Bell-Mouth) कहते हैं. इसके जरिए ही इस बांध में पानी के लेवल को कंट्रोल किया जाता है. इस तकनीक का उपयोग दुनिया में कई और स्थानों पर किया जाता है. लेकिन यह संभवतः पहला था, इसलिए इसे लेकर काफी चर्चा होती है. इसकी तकनीक पर इंजीनियर्स स्टडी करने जाते हैं. (फोटोः गेटी)

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साल 2017 और 2019 में जब यहां पर भारी मात्रा में बारिश हुई थी, तब ग्लोरी होल ने अपनी पूरी सक्रियता में था. इसे देखने के लिए हजारों की संख्या में पर्यटक आते थे. एक खबर ये भी आई थी कि साल 2019 में इसकी शूटिंग करते वक्त कोई व्यक्ति इस होल में गिर गया था, लेकिन पुख्ता जानकारी नहीं मिली कि वो बचा या नहीं. कुछ मीडिया संस्थानों ने कहा था कि गिरने वाला इंसान बच गया था.  (फोटोः गेटी)

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वैसे इस झील में तैरने और बोटिंग करना प्रतिबंधित है. दूसरा ये कि अगर कोई गलती से गिर भी जाए तो यह होल अपनी पूरी ताकत में बहने के लिए काफी ज्यादा समय लेता है, इसलिए अगर किसी को तैराकी आती है, तो वह इससे दूर जा सकता है. इस जगह पर अब तक एक ही मौत दर्ज की गई है. यह घटना 1997 की है, जब एक महिला गलती से गिर पड़ी. वह तैरते हुए इसके किनारों पर बने सीमेंट के ढांचे पर बैठ गई थी, लेकिन रेस्क्यू आने में देर हो गई. बाद में उसका शरीर कुछ घंटे बाद मिला. (फोटोः गेटी)
 

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इसकी देखरेख करने वाले इंजीनियरों का कहना है कि ग्लोरी होल में पानी का बहाव तेज नहीं रहता. बस ये काफी नीचे गिरता है. यह होल 22 मीटर चौड़ा है. इसकी गहराई 75 मीटर यानी 245 फीट है. यानी इंसान इसमें गिरेगा तो 245 फीट नीचे जाएगा. यह एक बार में 48 हजार क्यूबिक फीट पानी सोखता है. इसमें जाने वाला पानी आधा किलोमीटर से ज्यादा की यात्रा करने के बाद पुटाह क्रीक (Putah Creek) में खाली होता है. (फोटोः गेटी)

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1950 में इसे बनाने वाले इंजीनियरों का प्लान ये था कि इस गड्ढे का उपयोग बेहद विषम परिस्थितियों में ही किया जाएगा. वह भी हर 50 साल में. हालांकि करीब 72 साल में यह गड्ढा तीन बार खोला जा चुका है. जब भी यह खुलता है तो आसपास के लोगों को सूचनी दे दी जाती है, ताकि डाउनस्ट्रीम की तरफ कोई न जाए. पानी का बहाव तेज रहेगा. दुनिया में कई स्थानों पर ऐसे प्राकृतिक गड्ढे भी बन जाते हैं. जिनसे पानी का बहाव धरती की गहराइयों में होता है. (प्रतीकात्मक फोटोः पिक्साबे)