(Navratri Date 2018) नवरात्रि वर्ष में चार बार पड़ती है - माघ, चैत्र, आषाढ़ और आश्विन. इसमें सबसे शक्तिशाली नवरात्रि आश्विन की मानी जाती है, इसको शक्ति अर्जन का पर्व कहा जाता है. नवरात्रि से वातावरण के तमस का अंत होता है और सात्विकता की शुरुआत होती है. मन में उल्लास, उमंग और उत्साह की वृद्धि होती है. दुनिया में सारी शक्ति, नारी या स्त्री स्वरुप के पास ही है, इसलिए इसमें देवी की उपासना ही की जाती है. इस समय श्री हरि विष्णु योग निद्रा में लीन हैं, अतः इस समय देवी की उपासना ही कल्याणकारी होती है.
शारदीय नवरात्र (Shardiya Navratri) का खास महत्व है क्योंकि इस महीने से शुभता और ऊर्जा का आरम्भ होता है. ऐसे समय में देवी की पूजा कर उनसे सुख-समृद्धि की कामना करना बहुत शुभ माना गया है. इस बार नवरात्र 10 अक्टूबर से शुरू हो रहे हैं. नवरात्रि पर देवी पूजन और नौ दिन के व्रत का बहुत महत्व है. इन नौ दिनों में हर किसी को कुछ नियमों का पालन करना चाहिए.
आइए जानते हैं नवरात्र के समय में कौन से काम नहीं करने चाहिए और नवरात्र में किन नियमों का पालन करना चाहिए.
नवरात्रि में नौ दिन का व्रत रखने वालों को दाढ़ी-मूंछ और बाल नहीं कटवाने चाहिए. इस दौरान बच्चों का मुंडन करवाना शुभ होता है.
इस दौरान खाने में प्याज, लहसुन और नॉन वेज नहीं खाना चाहिए.
नौ दिन का व्रत रखने वालों को काले रंग के कपड़े नहीं पहनने चाहिए. इस दौरान सिलाई-कढ़ाई जैसे काम भी वर्जित होते हैं.
नवरात्र के दौरान नाखून काटना भी वर्जित होता है इसलिए नवरात्र शुरू होने से पहले ही नाखून काट लेने चाहिए.
नवरात्रि के दौरान हल्का और सात्विक भोजन करना चाहिए. नियमित खान पान में जौ और जल का प्रयोग जरूर करना चाहिए. इन दिनों तेल, मसाला और अनाज कम से कम खाना चाहिए
बिना दीपक जलाए कभी भी शक्ति की पूजा नहीं करें.
अगर आप नवरात्रि में कलश स्थापना कर रहे हैं, माता की चौकी का आयोजन कर रहे हैं या अखंड ज्योति जला रहे हैं तो इन दिनों घर खाली छोड़कर नहीं जाएं. पूजा घर को गंदा नहीं रखें.
अगर आप चालीसा या सप्तशती का पाठ कर रहे हैं तो किसी से बात करने के लिए चालीसा को बीच में ही ना रोक दें.
विष्णु पुराण के अनुसार, नवरात्रि व्रत के समय दिन में नहीं सोना चाहिए.
नवरात्र के दौरान मांसाहार और शराब इत्यादि से बिल्कुल दूर रहना चाहिए.
नवरात्र के दौरान दुर्गा मां की कृपा पाने के लिए घर में कलह का माहौल बिल्कुल नहीं होना चाहिए. लड़ाई-झगड़े और वाद-विवाद से बचना चाहिए.