भारत में शनि देव की दो तरह से पूजा होती है. तांत्रिक विधि से और वैदिक विधि से. तांत्रिक विधि से की जाने वाली पूजा कठोर रूप से होती है और यह केवल मंदिर में ही सम्पन्न हो सकती है.
कुल मिलाकर भारत वर्ष में चार प्रमुख पीठ हैं. शनि सिग्नापुर महाराष्ट्र ,उज्जैन,पश्चिम बंगाल और दिल्ली. इनमे सर्वाधिक महत्वपूर्ण पीठ शनि सिग्नापुर है. यहां शनि देव कि स्वयंभू प्रतिमा है, जिसका विशेष विधियों से पूजन किया जाता है.
शनि देव यहां खुले आकाश के नीचे एक चबूतरे पर विराजमान हैं. शनि की सर्वाधिक कृपा होने के कारण यहां घरों में ताले नहीं लगते ,और न ही चोरियां होती हैं. यहां शनि देव की विधिवत पूजा करने पर समस्त बाधाएं दूर होती हैं.
क्या हैं शनि धाम या शनि मंदिर जाने के नियम? क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?
- हमेशा पवित्र मन और स्वच्छ शरीर से से मंदिर में जाना चाहिए.
- प्रसाद में इलाइची दाना, नारियल और तेल समर्पित किया जाना चाहिए.
- बेल पत्र और चन्दन समर्पित करने से शनि देव प्रसन्न होते हैं.
- शनि के वैदिक या तांत्रिक मंत्र का जाप करें, संभव हो तो आरती में सम्मिलित हों.
- शनि देव के प्रसाद को समर्पित करके पूरी तरह से ग्रहण करें तथा पूर्ण रूप से बांट दें.
- मंदिर से लाकर कोई भी प्रतिमा, चित्र या प्रतीक घर पर न लगाएं.
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- जो भी समर्पित या दान करना है उसको वहीं पर सम्पन्न करें.
अगर आप शनि मंदिर नहीं जा पाते ऐसे करें पूजा.
- शनिवार को पीपल में तिल युक्त जल से अर्घ्य दें.
- शनि मंत्र का जाप करें तथा शनि की स्तुति करें.
- शनि देव के नाम पर घर के पश्चिम दिशा में सरसों का दीपक जलाएं तथा वहीं पर प्रसाद चढाएं.
- संध्या काल में गरीब, बीमार व्यक्ति को पूर्ण भोजन कराएं, भोजन में उड़द की दाल तथा काले चने जरूर शामिल करें.
- काले वस्त्र न धारण करें. केवल लाल वस्त्र धारण करके पूजा सम्पन्न करें.
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- घर में कभी भी शनि देव की प्रतिमा या चित्र न लगाएं.
- केवल शनि के बीज मंत्र को लिखकर टांग सकते हैं.