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किस रास्‍ते जाकर करें बाबा बर्फानी के दर्शन...

दूर तक फ़ैली बर्फ़ की चादर और उसके बीच प्रकट हो चुके हैं बाबा बर्फ़ानी. भक्तों को बाबा बर्फ़ानी का बुलावा आ चुका है. लेकिन अमरनाथ के इस आलौकिक रूप के दर्शन करना इतना आसान नहीं है.

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दूर तक फ़ैली बर्फ़ की चादर और उसके बीच प्रकट हो चुके हैं बाबा बर्फ़ानी. भक्तों को बाबा बर्फ़ानी का बुलावा आ चुका है. लेकिन अमरनाथ के इस आलौकिक रूप के दर्शन करना इतना आसान नहीं है.

बाबा अमरनाथ की गुफ़ा तक जाने के 2 रास्ते हैं. सबसे पुराना रास्ता है जम्मू-कश्मीर से पहलगाम होते हुए. जम्मू से करीब 15 किलोमीटर और श्रीनगर से 96 किलोमीटर दूर है पहलगाम. यहां से पवित्र गुफ़ा करीब 46 किमी दूर है. इस रास्ते से अमरनाथ धाम की यात्रा 5 दिन में पूरी होती है. पहलगाम से पवित्र गुफ़ा तक के हर पड़ाव के साथ जुड़ी है भगवान शिव की अमरकथा.

पहलगाम में शिव ने छोड़ा था अपना वाहन नंदी
अमरनाथ यात्रा जिस पहलगाम से शुरू होती है, उसके बारे में पौराणिक मान्यता है कि देवी पार्वती को अमरकथा सुनाते वक्त भगवान शिव ने अपने वाहन नंदी को इस स्थान पर छोड़ा था.

पहलगाम से 16 किमी दूर है चंदनवाड़ी. कहते हैं कि इसी जगह भगवान शिव ने अपनी जटा से चंद्रमा को अलग किया था, जिससे इस जगह का नाम पड़ा चंदनवाड़ी. चंदनवाड़ी से 16 किलोमीटर दूर है शेषनाग, जहां शिव ने त्यागा गले का 'हार'. यहां महादेव ने अपने गले के हार शेषनाग को छोड़ दिया था.

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शेषनाग से 4.6 किमी आगे है महागुण पर्वत. महागुण पर्वत पर शिव ने रोका गणेश को. पौराणिक मान्यता है कि महादेव ने अपने बेटे गणेश को इसी स्थान पर ठहरने का आदेश दिया था.

महागुण पर्वत से 6 किमी दूर है पंचतरनी. मान्यता है कि यहां आकर भगवान शिव ने पंचमहाभूतों यानी धरती, अग्नि, जल, वायु और आकाश को खुद से अलग कर दिया था. और सबसे मुक्त होकर भगवान शिव पहुंचे थे इस निर्जन गुफ़ा में, जहां उन्होंने देवी पार्वती को सुनाई थी आलौकिक अमरकथा.

दूसरा रास्‍ता 'दुर्गम' बालटाल का
अमरनाथ की पवित्र गुफ़ा तक पहुंचने का दूसरा रास्ता बालटाल का है. बालटाल के रास्ते अमरनाथ यात्रा करने के लिए श्रद्धालुओं को जम्मू से श्रीनगर और फिर सोनमर्ग होते हुए बालटाल पहुंचना होता है.

बालटाल के बेस कैंप से पवित्र गुफ़ की दूरी है 14 किमी. बालटाल के रास्ते अमरनाथ यात्रा सिर्फ़ एक दिन में पूरी हो जाती है. लेकिन बालटाल का रास्ता जितना छोटा है उतना ही मुश्किल. पहाड़ पर सीधी चढ़ाई चढ़कर इस रास्ते बाबा बर्फ़ानी तक वही पहुंच सकता है, जो शारीरिक रूप से पूरी तरह फ़िट हो.

रास्ता चाहे जितना भी लंबा हो, जितना भी मुश्किल हो, लेकिन साल में एक बार बाबा बर्फ़ानी जब अपनी इस दिव्य गुफ़ा में प्रकट होते हैं, तो लाख मुसीबत सहकर भी भक्त भोलेनाथ के दर्शन करने पहुंच ही जाते हैं.

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