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धर्म

मकर संक्रांति में तिल का महत्व और उसका वैज्ञानिक कारण

मकर संक्रांति में तिल का महत्व और उसका वैज्ञानिक कारण
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मकर संक्रांति का त्योहार हिन्दू धर्म के प्रमुख त्योहारों में शामिल है, जो सूर्य के उत्तरायण होने पर मनाया जाता है. इस दिन सूर्य धनु राशि को छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करता है और सूर्य के उत्तरायण की गति प्रारंभ होती है. भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में मकर संक्रांति के पर्व को अलग-अलग तरह से मनाया जाता है. आंध्रप्रदेश, केरल और कर्नाटक में इसे संक्रांति कहा जाता है, तमिलनाडु में इसे पोंगल पर्व के रूप में मनाया जाता है. पंजाब और हरियाणा में इस समय नई फसल का स्वागत किया जाता है और लोहड़ी पर्व मनाया जाता है, वहीं असम में बिहू के रूप में इस पर्व को उल्लास के साथ मनाया जाता है.
मकर संक्रांति में तिल का महत्व और उसका वैज्ञानिक कारण
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मकर संक्रांति का पर्व जिस प्रकार देश भर में अलग-अलग तरीके और नाम से मनाया जाता है, उसी प्रकार खान-पान में भी विविधता रहती है. इस दिन तिल का हर जगह किसी ना किसी रूप में प्रयोग होता ही है और इसके उपयोग होने के पीछे वैज्ञानिक कारण भी है.
मकर संक्रांति में तिल का महत्व और उसका वैज्ञानिक कारण
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गठिया में लाभदायक:
तिल में कॉपर, मैग्नीशियम, ट्राइयोफान, आयरन,मैग्नीज, कैल्शियम, फास्फोरस, जिंक, विटामिन बी 1 और रेशे प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं. एक चौथाई कप या 36 ग्राम तिल के बीज से 206 कैलोरी ऊर्जा प्राप्त होती है. इसके साथ ही जिनकी गठिया की शिकायत बढ़ जाती है, उन्हें इसके सेवन से लाभ होता है.
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मकर संक्रांति में तिल का महत्व और उसका वैज्ञानिक कारण
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बैक्टीरिया का खात्मा:
तिल में एंटीऑक्सीडेंट गुण भी पाए जाते हैं. यह रक्त के 'लिपिड प्रोफाइल' को भी बढ़ाता है. तिल शरीर में उपस्थित जीवाणुओं और कीटाणुओं का दमन करता है. तिल एक तरह से इनसेक्टिसाइड का काम करता है.
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सर्दी से राहत:
सर्दियों में शरीर का तापमान गिर जाता है. ऐसे में हमें बाहरी तापमान से अंदरुनी तापमान को बैलेंस करना होता है. तिल और गुड़ गर्म होते हैं, ये खाने से शरीर गर्म रहता है. सर्दी के मौसम में तिल और गुड़ से बने लड्डू खाने से जुकाम और खांसी में काफी आराम मिलता है.
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आयुर्वेद के अनुसार भी लाभदायक होता है तिल:
आयुर्वेद के अनुसार, तिल शरद ऋतु के अनुकूल होता है. आयुर्वेद के छह रसों में से चार रस तिल में होते हैं, तिल में एक साथ कड़वा, मधुर एवं कसैला रस पाया जाता है. ये सभी रस मनुष्य के शरीर के लिए अत्यन्त आवश्यक होते हैं.
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धार्मिक कारण भी जान लें:
हमारे धर्म शास्त्रों के अनुसार, तिल दान से शनि के कुप्रभाव कम होते हैं. तिल के सेवन से, तिल मिश्रित जल से स्नान करने से, पापों से मुक्ति मिलती है, निराशा समाप्त होती है. श्राद्ध व तर्पण में तिल का प्रयोग दुष्टात्माओं, दैत्यों, असुरों से बाधा होने का डर समाप्त हो जाता है. साथ ही मान्यता यह भी है कि माघ मास में जो व्यक्ति रोजाना भगवान विष्णु की पूजा तिल से करता है, उसके सारे कष्ट दूर हो जाते हैं. साथ ही इससे राहू और शनि के दोष का भी नाश होता है.

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