ज्योतिषशास्त्र में पंचक को बहुत अशुभ माना गया है. इस दौरान कुछ काम करने की मनाही है. इसे अशुभ और हानिकारक नक्षत्रों का योग माना जाता है. नक्षत्रों के मेल से बनने वाले विशेष योग को पंचक कहा जाता है. जब चन्द्रमा, कुंभ और मीन राशि पर रहता है, तब उस समय को पंचक कहते हैं. शनिवार से शुरू हुआ पंचक सबसे ज्यादा घातक होता है। इसे मृत्यु पंचक कहा जाता है. अगर इस दिन किसी कार्य की शुरुआत करने से व्यक्ति को काफी परेशानियों से गुजरना पड़ता है. तो इस दौरान कोई भी जोखिम भरा कार्य नहीं करना चाहिए. इस दौरान व्यक्ति की मौत तक हो सकती है.
मृत्यु पंचक 23 दिसंबर शनिवार को शुरु हो रहा है जो कि 28 दिसंबर, गुरुवार को 1 बजकर 37 मिनट में समाप्त होगा.
क्या है पंचक
धनिष्ठा नक्षत्र के तीसरे चरण से रेवती तक के नक्षत्रों को पंचक नक्षत्र कहा जाता है. आज धनिष्ठा नक्षत्र के साथ पंचक की शुरुआत हुआ है. पंचक इन 5 खास नक्षत्र में ही लगता है जो कि धनिष्ठा, शतभिषा, उत्तरा भाद्रपद, पूर्वा भाद्रपद व रेवती नक्षत्र आते हैं जिसमें कोई भी शुभ काम करने की मनाही है.
यह पंचक मृत्यु के बराबर परेशानी देने वाला होता है. इन पांच दिनों में किसी भी तरह के जोखिम भरे काम नहीं करने चाहिए. इसके प्रभाव से विवाद, चोट, दुर्घटना आदि होने का खतरा रहता है. इन दिनों कोई शुभ काम भी करने से बचना चाहिए.
पंचक में अगर किसी की मृत्यु हो गई है तो उसके अंतिम संस्कार ठीक ढंग से न किया गया तो पंचक दोष लग सकते है. इसके बारें में विस्तार से गरुड़ पुराण में बताया गया है जिसके अनुसार अगर अंतिम संस्कार करना है तो किसी विद्वान पंडित से सलाह लेनी चाहिए और साथ में जब अंतिम संस्कार कर रहे हो तो शव के साथ आटे या कुश के बनाए हुए पांच पुतले बना कर अर्थी के साथ रखें और इसके बाद शव की तरह ही इन पुतलों का भी अंतिम संस्कार विधि-विधान से करें.
पंचक के दौरान जब रेवती नक्षत्र चल रहा हो, उस समय घर की छत नहीं बनाना चाहिए, ऐसा विद्वानों का मत है. इससे धन हानि और घर में क्लेश होता है.
पंचक के दौरान दक्षिण दिशा में यात्रा नहीं करनी चाहिए, क्योंकि दक्षिण दिशा, यम की दिशा मानी गई है.
पंचक में चारपाई बनवाना अच्छा नहीं माना जाता है. विद्वानों के अनुसार ऐसा करने से घर में कोई बड़ा संकट खड़ा होता है.
पंचक के दौरान जिस समय घनिष्ठा नक्षत्र हो उस समय घास, लकड़ी आदि जलने वाली वस्तुएं इकट्ठी नहीं करना चाहिए, इससे आग लगने का भय रहता है.