भारत में कई ऐसे धार्मिक स्थल हैं, जहां महिलाओं को जाने की अनुमति नहीं है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि कई ऐसे मंदिर भी हैं, जहां पुरुषों का जाना वर्जित माना जाता है. सिर्फ महिलाएं ही इन मंदिरों में पूजा कर सकती हैं. आइए जानते हैं ऐसे ही कुछ मंदिरों के बारे में...
आट्टुकाल भगवती मंदिर- केरल में स्थित आट्टुकाल भगवती मंदिर महिलाओं को समर्पित है. इस मंदिर में पोंगल उत्सव बड़ी धूम-धाम से मनाया जाता है. पोंगल उत्सव में एक साथ 30 लाख महिलाओं के भाग लेने के कारण गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में इस मंदिर का नाम दर्ज हो चुका है. इस मंदिर में पुरुषों को आने की इजाजत नहीं है.
बह्मा मंदिर- 14वीं ईस्वी में बना पुष्कर के राजस्थान में स्थित बह्मा मंदिर में शादीशुदा पुरुषों का आना वर्जित है. बता दें, ये दुनिया का इकलौता बह्मा मंदिर है. पुराणों में बताया गया है कि भगवान बह्मा को पुष्कर नदी के किनारे अपनी पत्नी मां सरस्वती के साथ यग करना था. लेकिन मां सरस्वती को वहां पहुंचने में देर हो गई थी. इस वजह से बह्मा जी ने मां गायत्री के साथ शादी कर यज्ञ किया था. इस बात से क्रोधित होकर मां सरस्वती ने बह्मा मंदिर को श्राप दिया कि किसी भी शादीशुदा पुरुष को इस मंदिर में आने की इजाजत नहीं है. इसलिए इस मंदिर में पुरुषों का जाना वर्जित है.
चक्कूलाथूकावु मंदिर- केरल में स्थित चक्कूलाथूकावु मंदिर में मां भगवती की पूजा होती है. इस मंदिर में हर वर्ष नारी पूजा की जाती है. इस दौरान दिसंबर महीने के पहले शुक्रवार को पुरुष पुजारी 10 दिनों तक व्रत करने वाली महिलाओं के पैर धोते हैं, जिसे धनु कहते हैं .बता दें, नारी पूजा में पुरुषों का आना सख्त मना है.
मां भगवती मंदिर- कन्याकुमारी में स्थित यह मंदिर मां भगवती दुर्गा के कन्या रूप को समर्पित है. पुराणों के मुताबिक, यहां देवी सती की रीढ़ की हड्डी की गिरी थी. मां भगवती को संन्यास की देवी भी माना जाता है. यही कारण है कि उनके मंदिर में संन्यासी पुरुष केवल मंदिर के दरवाजे तक ही आ सकते हैं, जबकि शादीशुदा पुरुषों को यहां आने की सख्त मनाही है.
कामाख्या मंदिर- कामाख्या शक्तिपीठ गुवाहाटी (असम) के पश्चिम में 8 कि.मी. दूर नीलांचल पर्वत पर स्थित है. माता के सभी शक्तिपीठों में से कामाख्या शक्तिपीठ को सर्वोत्तम कहा जाता है. माता की माहवारी के उत्सव के दौरान इस मंदिर में पुरुषों का आना सख्त मना है. सिर्फ महिला पुजारी और संन्यासी ही इस दौरान पूजा करती हैं. साथ ही इस दौरान माता सती के माहवारी के कपड़ों को श्रद्धालुओं बांटें जाता है.
संतोषी मां व्रत- संतोषी मां का व्रत सिर्फ महिलाएं और कन्याएं ही रख सकती हैं. व्रत के दौरान किसी भी तरह के खट्टे फल और आचार खाने की सख्त मनाही होती है. मां संतोषी के मंदिर में शुक्रवार के दिन पुरुषों का जाना मना है. संतोषी माता के मंदिर में पुरूषों को पूजा करने की भी मनाही है.
त्र्यंबकेश्वर मंदिर- महाराष्ट्र के नासिक में स्थित इस मंदिर के गर्भगृह में पहले महिलाओं को जाने की इजाजत नहीं थी, क्योंकि इस मंदिर का गर्भगृह भगवान शिव को समर्पित है. लेकिन साल 2016 में बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक ऑर्डर पास किया कि अगर महिलाओं को मंदिर के गर्भगृह में जाने की अनुमति नहीं है तो पुरुषों के जाने पर भी रोक लगनी चाहिए. तभी से मंदिर के गर्भगृह में पुरुषों के जाने पर भी रोक लगा दी गई.