रंगों के सबसे पावन पर्व होली की तैयारियां शुरू हो गई हैं. शास्त्रों में फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से लेकर होलिका दहन तक की अवधि को होलाष्टक कहा जाता है. होली के आठ दिन पहले से होलाष्टक मनाया जाता है. इस काल का विशेष महत्व होता है. इसी में होली की तैयारियां शुरू हो जाती हैं. इस दौरान ये उपाय करने से बहुत लाभ होता है.
होलाष्टक के दौरान करें दिव्य उपाय-होलाष्टक पर प्रकृति में नकारात्मकता का प्रभाव होने की वजह से सभी लोगों को नव ग्रहों का दान करना चाहिए.
अपनी उम्र के बराबर बेलपत्र लें, सभी बेलपत्र पर सफेद चंदन से राम-राम लिखें और उन्हें उल्टा करके शिवलिंग पर नमः शिवाय नमः शिवाय मंत्र का जाप करते हुए अर्पण करें. ऐसा करने से होलाष्टक के दौरान आपके शारीरिक कष्ट में कमी आएगी.
होलाष्टक के दौरान हल्दी चावल को पीसकर उसमें गंगाजल मिलाएं और अपने मुख्य द्वार पर स्वस्तिक या ॐ बनाएं. ऐसा करने से घर में नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश नहीं होगा.
होलाष्टक के दौरान यदि आपके परिवार में कोई बीमार है, उसके सिर से एक जटावाला नारियल 7 बार उल्टा घुमाकर बहते पानी में प्रवाह करें. ऐसा करने से बीमारी जल्द खत्म होगी.
व्यापारिक नुकसान से बचने के लिए एक सुपारी और पांच मोदक तथा पांच लाल गुड़हल के फूल भगवान गणेश को दाएं हाथ से सुबह के समय अर्पण करें. वापस आते समय जरूरतमंद व्यक्ति को कुछ ना कुछ दान करें.
नजरदोष से बचने के लिए एक लोटे में जल और नमक मिलाकर सिर से उल्टा वारकर घर से बाहर फेंक दें. यदि आपको सिर दर्द की समस्या है सुबह के समय उगते हुए सूर्य को तांबे के लोटे से जल दें.
नौकरी की समस्या हेतु काला कपड़ा, काला उड़द, काला तिल लोहे का सामान शनिवार की शाम किसी जरूरतमंद व्यक्ति को दान करें.
पारिवारिक कलह क्लेश को खत्म करने के लिए होलाष्टक की शाम से एक मिट्टी के दीय में देसी कपूर रखकर चलाएं और पूरे घर में दिखाएं.