5. यथाशक्ति तांबे, पीतल, चांदी के गृह-उपयोगी नवीन बर्तन और जेवर खरीदना चाहिए.
6. हल जुती मिट्टी को दूध में भिगोकर उसमें सेमर की शाखा डालकर तीन बार अपने शरीर पर फेरें.
7. कार्तिक स्नान करके प्रदोष काल में घाट, गौशाला, बावड़ी,
कुआँ, मंदिर आदि स्थानों पर तीन दिन तक दीपक जला