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मंगल से शनि तक, जानें ग्रहों की उल्टी चाल कब बनती है इंसान की आफत

ग्रह जब सामान्य गति से भ्रमण करता है तो तो उसको मार्गी कहते हैं. जब तीव्र गति से चलता है तो उसको अतिचारी कहते हैं और जब इसी तीव्रता में वह पीछे की ओर चलने लगता है तो उसको वक्री कहते हैं.

मंगल से शनि तक, जानें ग्रहों की उल्टी चाल कब बनती इंसान की आफत मंगल से शनि तक, जानें ग्रहों की उल्टी चाल कब बनती इंसान की आफत
स्टोरी हाइलाइट्स
  • ग्रहों के वक्री होने से उनके परिणाम बदल जाते हैं
  • ग्रह वक्री होकर अत्यधिक शक्तिशाली हो जाते हैं

ग्रहों की तमाम तरह की स्थितियां होती हैं. इसमें भी ग्रहों की गति के आधार पर मुख्यतः तीन तरह की स्थितियां पाई जाती हैं- मार्गी, वक्री और अतिचारी. ग्रह जब सामान्य गति से भ्रमण करता है तो तो उसको मार्गी कहते हैं. जब तीव्र गति से चलता है तो उसको अतिचारी कहते हैं और जब इसी तीव्रता में वह पीछे की ओर चलने लगता है तो उसको वक्री कहते हैं. वास्तव में ग्रह कभी पीछे या उलटे नहीं चलते बल्कि उनकी गति के कारण एक आभास होता है. इसी आभास को ग्रहों का वक्री होना कहा जाता है.

ग्रहों वक्री होने का परिणाम क्या होता है?
ग्रहों के वक्री होने से उनके परिणाम बदल जाते हैं. ऐसा माना जाता है कि इससे उसके परिणाम उल्टे हो जाते हैं. जबकि ऐसा होने पर ग्रह एकसाथ दो भावों को प्रभावित करते हैं और उनकी दृष्टि काफी सारे भावों पर पड़ने लगती है. इसीलिए ग्रह वक्री होकर अत्यधिक शक्तिशाली हो जाते हैं. सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते हैं. जबकि राहु और केतु सदैव वक्री रहते हैं.

वक्री मंगल का प्रभाव
- व्यक्ति खूब साहसी और उदार होता है 
- व्यक्ति अच्छा सर्जन हो सकता है 
- ख़राब ग्रहों का प्रभाव हो तो अपराध की तरफ चला जाता है 
- अगर वक्री मंगल दुष्प्रभाव दे रहा हो तो मंगलवार का व्रत शुभ होता है 

वक्री बुध का प्रभाव
- व्यक्ति चालाक होता है 
- किसी भी प्रकार से धन कमाना जानता है 
- अगर ख़राब ग्रहों का प्रभाव हो तो व्यक्ति स्वार्थी और दरिद्र हो जाता है 
- अगर वक्री बुध दुष्प्रभाव दे रहा हो तो बुधवार को हरी चीज़ों का दान करना शुभ होता है 

वक्री बृहस्पति का प्रभाव
- यह व्यक्ति को आध्यात्मिक और ज्ञानी बनाता है 
- इसके कारण व्यक्ति नीचे से काफी ऊंचाई तक पंहुच जाता है 
- पर इसके कारण व्यक्ति को जीवन में काफी संघर्ष करना पड़ता है 
- अगर वक्री बृहस्पति का दुष्प्रभाव हो तो शिव जी की उपासना अचूक होती है 

वक्री शुक्र का प्रभाव
- यह व्यक्ति को आकर्षक और खूबसूरत बनाता है 
- इसके कारण व्यक्ति अक्सर ग्लैमर के क्षेत्र में पंहुच जाता है 
- परन्तु यह चरित्र को कमजोर करता है 
- व्यक्ति को जीवन में सही साथी नहीं मिलता 
- अगर वक्री शुक्र का दुष्प्रभाव हो तो सूर्य की उपासना लाभकारी होती है 

वक्री शनि का प्रभाव
- वक्री शनि, व्यक्ति को या तो राजा बनाता है या रंक 
- यह कुंडली में हो तो व्यक्ति पर पूर्वजन्म का प्रभाव होता ही है 
- व्यक्ति कभी कभी जन्म से ही विलक्षण दिखता है 
- अगर वक्री शनि का दुष्प्रभाव हो तो पीपल का वृक्ष लगवाना लाभकारी होता है

 

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