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जानें क्यों कहा जाता है महाशिवरात्र‍ि के व्रत को सबसे ताकतवर...

महाशिवरात्र‍ि का व्रत रखने सेभगवान शिव का आशीर्वादमिलता है. लेकिन इसके कुछनियम भी हैं जिनका ध्यान नरखने पर व्रत अधूरा रह जाताहै.

मान्यता है कि महाशि‍वरात्र‍ि के दिन ही शि‍व-पार्वती का विवाह हुआ था मान्यता है कि महाशि‍वरात्र‍ि के दिन ही शि‍व-पार्वती का विवाह हुआ था

भगवान शिव में गहरी आस्था रखने वालों के लिए महाशिवरात्र‍ि किसी महोत्सव से कम नहीं है. माना जाता है कि इस दिन भगवान शिव और देवी पार्वती का विवाह हुआ था. यही वजह है कि शिव भक्त इसे विशेष धूमधाम के साथ मनाते हैं.

वहीं मान्यता यह भी है कि इसी दिन भगवान शिव ने समुद्र मंथन से निकला विष पिया था और उनको नींद न आने देने के लिए गण पूरी रात उनके साथ जागे थे. उनका आशीर्वाद पाने के लिए वे इस दिन खास रीतियों से व्रत भी रखते हैं. बता दें कि इस व्रत को सबसे ताकतवर व्रत भी कहा जाता है.

महाशिवरात्र‍ि पर व्रत रखने वालों को सच्चे मन और तमाम दोषों से दूर होकर इस दिन शिव अराधना करनी चाहिए. शिव को हर मनोकामना पूरी करने वाला माना जाता है और वे अपने भक्तों के सभी कष्ट दूर करते हैं.

कब से शुरु है व्रत
इस साल महाशिवरात्र‍ि का योग 7 मार्च दोपहर 1:20 से शुरू होगा. शाम की पूजा का समय 6:42 बताया जा रहा है. इसके बाद यह पूजा का समय रात 9:26, 8 मार्च की सुबह 12:31 और फिर सुबह 3:36 से लेकर 6:42 तक का है. यानी महा शिवरात्र‍ि की पूजा 8 मार्च को सुबह 6:42 तक चलेगी.
वैसे महाशिवरात्र‍ि की चर्तुदशी तिथि 8 मार्च को सुबह 10:34 मिनट तक चलेगी. इसके बाद शिव भक्तों को नहाकर अपना व्रत खोलना चाहिए.

जानें क्या हैं इस व्रत वो नियम जिनका पालन भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए किया जाना चाहिए :
- महाशिवरात्र‍ि का व्रत अगले दिन सुबह तक चलता है. इस दौरान गर्म पानी और काले तिल से स्नान करें. माना जाता है कि इस तरह तन और मन, दोनों ही पवित्र होते हैं.
- शिवलिंग को दूध और शहद से स्नान कराना चाहिए.
- दिन में ऊं नम: शिवाय का जाप करते रहें.
- अगर स्वस्थ हों तो ही निर्जल व्रत रखें.
- सूरज ढलने के बाद इस व्रत में कुछ ग्रहण नहीं किया जाता है. व्रत में कुट्टू का आटा, साबूदाना, सेंधा नमक, ताजे फल आदि लेने चाहिए.
- इस दिन दान करना भी अच्छा रहता है.

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